Thursday, November 12, 2020

जनवरी महीने 2021 की ज्योतिषिय रूप महत्वपूर्ण घटनाएं


      

              

         गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2021     

             प्रारम्भ की   तिथि 

समय 

नक्षत्र का नाम 

समाप्ति की तिथि 

समय 

01-01-2021

20:15

अश्लेषा 

02-01-2021

20:17

02-01 -2021

20:18

   मघा 

03-01 -2021

19:57

10-01-2021

09 :10

 ज्येष्ठा

11  -01 -2021

09:10 

 11-01-2021

09:11

  मूला 

  12-01 -2021

07 :38

19 -01 -2021

09 :55

   रेवती 

20 -01 -2021

12 :36 

20 -01 -2021

12 :37 

   अश्विनी 

21 -01-2021

15:37 

             https://panchaangastro.blogspot.com/2019/08/blog-post_6.html

             4 जनवरी 2021 कोभारतीय मानक समय  शुक्र ग्रह धनु राशि में गोचर करेंगे।इस समय शुक्र  मूल नक्षत्र में स्थित है।राशि के स्वामी बृहस्पति और नक्षत्र के स्वामी केतु है।शुक्र का  गोचर 25 दिनों के लिए है। शुक्र का गोचर जातक के जन्म चन्द्र से पहले,दूसरे,तीसरे,चौथे ,पंचम,आठवें, नवम ,ग्यारह, और बारहवें भाव मे शुभ फल  देता है यदि आठवें,नवम, सातवें, पहले और छठे ,तीसरे में चन्द्रमा के अतिरिक्त कोई ग्रह न हो। नवम भाव भाग्यस्थान होता हैं। गुरु,पिता, स्वास्तिक, आग्नितत्व, पुनर्जन्म के कर्मो , ,धार्मिक, पूर्व दिशा का स्थान माना जाता हैं।शुक्र कारक पति,पत्नी, प्रेम सम्बंध, खुशियों, कामेच्छाओं, संभोग, शादी, संगीत, गीत,कला आदि कारक है।शनि -नीच का बृहस्पति दोनों जल राशि में स्थित हैं।जोकि  राजैनतिक जोकि  राजैनतिक परस्पर विरोधी में होगें। सूर्य-बुध और शुक्र तीनों धनु राशि मे स्थित होने से देश मे सम्प्रदायों और धार्मिक समस्याओं उत्पन्न होंगे जिसके सरकार उचित कदम उठाने पड़ेगे। देश के स्थानों पर रक्तपात और भूंकम्प आदि घटनाओं घटित होगी।
  https://knowtransit.blogspot.com/2020/08/on-january-4-2021-venus-will-transit-in.html


                    5 जनवरी 2021 को भारतीय मानक समय 05 बजकर 17 मिनट पर बुध मकर राशि मे अस्त होकर गोचर करेगें। बुध ग्रह उत्तरषाढ़ा नक्षत्र में स्थित है।उत्तरषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्य और  राशि स्वामी शनि देव हैं। बुध ग्रह कारक हैं दूर-संचारमाध्यमों,शिक्षा, ज्ञान इंद्रियों, लेखक,प्रकाशन,लेखन,बुद्धिजीवी,बुद्धिमता, ज्योतिषशास्त्रों, विज्ञापन, वाणिज्य और व्यापार, भाषाओं निपुणता, मानसिकतनाव के कारक है।शनि-बृहस्पति-बुध की युति और सूर्य-शुक्र धनु राशि मे स्थित हैं। ग्रहों की युति के आधार राजैनतिक बिन्दु मध्य नजर से देश में नये योजनाओं कार्यविन्त होंगे। देश आर्थिकस्थिति में मन्द होगी।धर्म अधिकारी-कर्मा -संचार माध्यमों को एक सत्ता द्वारा निर्धारित होगा। जो कोई भी ग्रह अपनी अस्त अवस्था मे उनके प्रभाव अति उग्र रूप में प्रतिपादित करता है।यदि जन्म कुंडली मे अच्छा होगा।उसके प्रभाव कम हो जाएंगे।जन्मकुंडली में खराब होगा और बुरे प्रभाव देगा।

  https://knowtransit.blogspot.com/2020/09/on-january-5-2021-mercury-will-transit.html
  

     पंचक नक्षत्र मास जनवरी 2021

        प्रारम्भ की तिथि 

समय 

नक्षत्र का नाम 

समाप्ति की तिथि 

समय 

          10:01-2021

  10 :50

  ज्येष्ठा 

11-01-2021 

09:10

          15-01 -2021

  05:05

धनिष्ठा

16-01-2021

05:17

            16 -01 -2021 

05 :18

शतभिषा 

  17-01-2021 

06:09

            17 -01-2021 

06 :10

पूर्वाभाद्रपद


  18-01-2021

07 :43

            18-01-2021

07:44

  उत्तरभाद्रपद  

19-01-2021

09:54

          19-1-2021

09:55

रेवती

20-01-2021

12:36


            https://panchaangastro.blogspot.com/2019/07/blog-post_14.html

जनवरी 7,2020 को भारतीय मानक समय 19 बजकर 58 मिनट मकर राशि मे 08:13 अंश अस्त होने जा रहे है।शनि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में स्थित हैं। उत्तरषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं। शनि उस समय नष्ट या अस्त होते हैं।जब कोई ग्रह सूर्य के निकट आ जाते है। मकर राशि मे बुध और शनि दोनो ही अस्त है बृहस्पति भी इस समय नीच राशि मे है उसके मंगल की दशम दृष्टि से देखना ।देश मे सम्प्रदायों , धर्मिक, घटनाएं घटित होगी।भूकंप और रक्तपात जैसे उपद्रव घटित होगी।मंगल की दृष्टि सूर्य और शुक्र पर होगी।राजनैतिक व्यक्ति की मृत्यु से देश मे अहिंसा और आगजनी घटनाएं भी होगी।देश मे आर्थिकस्थिति हालात खराब होगी।जिससे भुखमरी, जनता परेशानी होगी।शनि की दृष्टि उत्तर दिशा और पश्चिमी देशों उपद्रव,समुंद्री तूफान, भूकंप आदि घटनाएं घटित होगी।

            https://knowtransit.blogspot.com/2020/08/on-january-7-2021-saturn-will-be.html

जनवरी 14,2021 को भारतीय मानक समय 07:36 मिनट सूर्य मकर राशि मे गोचर करेगें।सूर्य उत्तरषाढ़ा नक्षत्र के दूसरे चरण में स्थित हैं।शनि मकर राशि के स्वामी हैं।शनि-बृहस्पति-चन्द्र-बुध पहले से विद्यमान है।मंगल की दशम दृष्टि सूर्य-शनि-बृहस्पति-बुधऔर चन्द्र पर है।जो भंयकर प्राकृतिक आपदाओं के सूचक है एवं कुछ उत्तरभागीय प्रान्तों ,सीमा क्षेत्र प्रांतों तथा मुस्लिम राष्ट्रों में उग्रवाद से भारी जनधनहानि के योग हैं। आर्थिक मंदी के कारण मंहगाई कंट्रोल पाना सरकार के लिए कठिन है।कश्मीर, आसाम, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में उग्रवादी घटनाओं से धनजनहानी के संकेत है।
https://knowtransit.blogspot.com/2020/11/on-january-142021-sun-transit-in.html

15 जनवरी 2021 को बृहस्पति श्रवण नक्षत्र में स्थित 03 बजकर 28 मिनट मकर राशि मे अस्त होने जाएगे । इस दौरान बृहस्पति सूर्य-शनि-बुध-चन्द्र की युति में मकर राशि मे स्थित हैं।भंयकर प्राकृतिक आपदाओं के सूचक है कुछ उत्तरी भागों प्रांतों ,सीमाएँ प्रांतों ,मुस्लिम राष्ट्र में उप द्रव से भारी धन जन हानि के योग बन रहे। मंहगाई पर कंट्रोल पाना मुश्किल होगा। कश्मीर, आसाम, उत्तराखंड, एवं छत्तीसगढ़ में उपद्रव से भारी होगी।


              https://knowtransit.blogspot.com/2020/05/on-january-152021-jupiter.html

    25 जनवरी 2021 को बुध धनिष्ठा नक्षत्र में स्थित भारतीय मानक समय 12बजकर 37 मिनट पर कुम्भ राशि मे गोचर करेंगे।शनि की राशि मे बुध मंगल के नक्षत्र में स्थित है।सूर्य-बृहस्पति-शनि की युति में मकर राशि मे स्थित हैं।इस समय शनि-बृहस्पति अस्त स्थिति में है।कि प्रधान नेतृत्व को बड़े ही भयंकर स्थितियों से गुजर पड़ेगा। कर्मेश-धर्मेश अस्त स्थिति में है। बुध ग्रह कारक बुद्धि, शिक्षा,एस्ट्रोनॉमी, पत्रकारिता, लेखक,लेखन, कम्युनिकेशन माध्यम, मामा,मौसी, चचेरे भाई-बहनों के कारक ग्रह बुध है।

https://knowtransit.blogspot.com/2020/10/on-january-282021-venus-wiill-transit.html

28 जनवरी 2021 को शुक्र ग्रह भारतीय मानक समय 03 बजकर 35 मिनट पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में मकर राशि मे गोचर करेगें।शनि-सूर्य-बृहस्पति के साथ युति में होंगे। मंगल ग्रह अपनी दशम दृष्टि से सूर्य-शनि-बृहस्पति-शुक्र को देंगे।ग्रहो की इस युति और मंगल की दृष्टि से राजनेताओं के लिए संघर्षपूर्ण स्थिति का निर्माण कर रहे हैं।और प्रधान नेताओं को देश की धार्मिक और साम्प्रदायिक कठिन समस्याओं से निपटने के लिए  उचित कदम उठाने पड़ेगे।देश मे कही पर हिंसा से रक्तपात के द्वारा अशान्ति और भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं से हानि होगी।

              https://knowtransit.blogspot.com/2020/10/on-january-282021-venus-wiill-transit.html

30 जनवरी 2021 को बुध ग्रह  वक्री गति से भारतीय मानक समय 16 बजकर 44 मिनट पर धनिष्ठा नक्षत्र में कुंभ राशि मे गोचर करेगें।शनि-सूर्य-बृहस्पति -शुक्र मकर राशि मे  युति में हैं। मंगल ग्रह अपनी दशम दृष्टि से सूर्य-शनि-बृहस्पति-शुक्र को देंगे।ग्रहो की इस युति और मंगल की दृष्टि से राजनेताओं के लिए संघर्षपूर्ण स्थिति का निर्माण कर रहे हैं।और प्रधान नेताओं को देश की धार्मिक और साम्प्रदायिक कठिन समस्याओं से निपटने के लिए  उचित कदम उठाने पड़ेगे।देश मे कही पर हिंसा से रक्तपात के द्वारा अशान्ति और भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं से हानि होगी।


    https://knowtransit.blogspot.com/2020/09/on-january302021-mercury-will.html

Thursday, October 8, 2020

दिसम्बर महीने 2020 की ज्योतिषीय रूप महत्वपूर्ण घटनाएं

 

       1       पंचक नक्षत्र मास दिसंबर 2020

        प्रारम्भ की तिथि 

समय 

नक्षत्र का नाम 

समाप्ति की तिथि 

समय 

          19 -12-2020 

  07 :17

  घनिष्ठा  

19-12  -2020 

19:40

          19 -12 -2020 

  19-41

शतभिषा 

21-12-2020 

21:01

            20 -12 -2020 

21 :02

पूर्वाभाद्रपद 

  23-12-2020 

23:02

            21 -12-2020 

23 :03

उत्तरभाद्रपद

  23-12-2020 

01 :37

            23-12-2020 

01 :38

    रेवती

24-12 -2020 

04:34








    

         2.        गण्ड मूल नक्षत्र दिसम्बर 2020      

प्रारम्भ की तिथि 

समय 

नक्षत्र का नाम 

समाप्ति की तिथि 

समय 

5 -12 -2020

14:28 

अश्लेषा 

6 -12 -2020

14 :46 

6 -12 -2020

14 :47 

   मघा 

07 -12 -2020

14:33

14 -12 -2020

04 :40

  ज्येष्ठा 

14  -12 -2020

23 :25 

 14 -12 -2020

23 :26

  मूला 

  15 -12 -2020

21 :32

23 -12 -2020

01 :36 

   रेवती 

24 -12 -2020

04 :34 

24 -12 -2020

04 :35 

   अश्विनी 

25 -12 -2020

07:37 

              3.           11 दिसम्बर 2020 को शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि मे गोचर करेगें।

11 दिसम्बर 2020 को भारतीय मानक समय 6 बजकर 03 मिनट पर शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि मे गोचर करेगें। शुक्र इस समय विशाखा नक्षत्र में स्थापित है। विशाखा नक्षत्र चतुर्थ पद के स्वामी बृहस्पति हैं। वृश्चिकराशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। वृश्चिक राशि में सूर्य,बुध, केतु ग्रह विद्यमान है। आत्मा, शक्ति, मोक्ष,  संचार, सुंदरता का प्रवेश हैं। भचक्र में ये 16वां नक्षत्र है। 16 अंक को विपत्ति,मानसिक संताप को जोड़ा जाता है।विशाखा नक्षत्र का प्रभाव 45 से 50 वर्ष की आयु में दिखता है।कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। तीन ग्रह ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित हैं।जिसके स्वामी बुध ग्रह है।शुक्र+बुध+सूर्य+केतु का राहु का समसप्तक योग बना हुआ है।अतः कही स्थानों पर वर्षा और वायु की विषमता से खड़ी फसलों को हानि होगी।शनि की दृष्टि की वजह से तथा बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष,उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।


                4.                  15दिसंबर 2020 सूर्य धनुराशि में गोचर करेंगे।

15 दिसम्बर 2020 को भारतीय मानक समय 20 बजकर 48 मिनट पर सूर्य ग्रह धनु राशि मे गोचर करेगें। सूर्य इस समय मूल नक्षत्र में स्थापित है। मूल नक्षत्र चतुर्थ पद के स्वामी केतु हैं। धनु राशि के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं। वृश्चिक राशि में सूर्य,चन्द्र  ग्रह विद्यमान है। मन-आत्मा का प्रवेश हैं। भचक्र में ये 19 वें नक्षत्र है। 19अंक को आद्योपांत, लौकिक सुख,प्रभु का सच्चा सुख पाने की कोशिश के साथ जोड़ा जाता है।  सूर्य मूल नक्षत्र में है चन्द्र भी मूल नक्षत्र में स्थित हैं। ।बृहस्पति और शनि द्वितीय भाव मे स्थित है।किसी दुःखद घटना से परेशानी बनेगी।शनि की दृष्टि मंगल पर है जिससे उग्रवादीजन्य घटना से जनधनहानि की भी सम्भावना बनती दिखाई दे रही। हैं।व्यापारीवर्ग में सरकारी शासन तन्त्र के प्रति जनसाधारण असुन्तुष्ट रहेगा।ओद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की योजना आर्थिक संकट से जूझे।प्राकृतिक प्रकोप से पर्वतीय भूभाग में हानि के योग बन रहे है। बुध + शुक्र+केतु का अतः कही स्थानों पर वर्षा और वायु की विषमता से खड़ी फसलों को नुकसान होगा।शनि की दृष्टि की। कारण से और बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष, उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।

             5.        24दिसंबर 2020 को मंगल ग्रह मेष राशि मे गोचर करेगें।

24 दिसम्बर 2020 को भारतीय मानक समय 09बजकर 50मिनट पर मंगल ग्रह मेष राशि मे गोचर करेगें। मंगल इस समय अश्विनी नक्षत्र में स्थापित है। अश्विनी नक्षत्र केतु ग्रह हैं।मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। मेष राशि में सूर्य,चन्द्र  ग्रह विद्यमान है। मन-शक्ति का प्रवेश हैं। भचक्र में ये प्रथम नक्षत्र है। 1अंक को सृष्टि तारा हैं तो नारी को सृजन शक्ति का प्रतीक माना जाता हैं।अश्व का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। सिर का सम्बंध मस्तिष्क व सभी अवयवों पर नियंत्रण शक्ति से है।अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव 35 से 50 वर्ष की आयु में दिखता है।स्वभाव और कार्यशैली को भली प्रकार समझा जा सकता है। दोंनो ग्रह अश्विनी नक्षत्र में स्थित है।शनि की मंगल पर दृष्टि रहेगी।शनि-बृहस्पति मकर राशि मे स्थित हैअतः प्रजा में रोग ,प्राकृतिक प्रकोप,भारी उपद्रवो से भारी कष्ट हो।कही स्थानों पर वर्षा और वायु की विषमता से खड़ी फसलों को नुकसान होगा।शनि की दृष्टि की। कारण से और बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष, उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।


             6.  17दिसंबर 2020 को बुध धनु राशि मे गोचर करेगे।
             17दिसंबर 2020 को  भारतीय मानक समय 10बजकर 47 मिनट पर बुध ग्रह धनु राशि मे गोचर करेगें। बुध इस समय मूल नक्षत्र में स्थापित है। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। धनु राशि के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं। वृश्चिक राशि में सूर्य,चन्द्र  ग्रह विद्यमान है। मन-आत्मा का प्रवेश हैं। भचक्र में ये 19 वें नक्षत्र है। 19अंक को शौलाबिच्छू का डंक हैं, इस तारे की सतह के तापमान 30 हजार सेल्शियस आंका गया है।मूल नक्षत्र सबसे दक्षिणी नक्षत्र है।मूल नक्षत्र में जन्म वाला जातक सीधा,सरल व स्पष्टवादी होता है।कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने कठोर परिश्रम करना पड़ता है। तीन ग्रह उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में स्थित हैं। जिसके स्वामी सूर्य ग्रह हैं।शनि + बृहस्पति + चन्द्र युति  में है।शनि की मंगल ग्रह पर है।अतः कही स्थानों पर वर्षा और खड़ी फसलों को नुकसान होगा।  बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष, उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।

अगस्त के लिए पंचक तिथियां(सन 2026)

                                                 गण्डमूल नक्षत्र मास   8 /2026   प्रारम्भ तिथि     नक्षत्र   ...