पंचक नक्षत्र
1 जिस समय चन्द्रमा पूर्वभद्रापद नक्षत्र में स्थित कुम्भ राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 31 जनवरी 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार रात्रि 01 बजकर 29 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 1 जनवरी 2020 को रात्रि 28 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है।इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाते नियम के अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में स्थित मीन राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 1जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार रात्रि 04 बजकर 23 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 3 जनवरी 2020 को 07 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है।इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाते नियम के अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में स्थित मीन राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 3 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार रात्रि 07 बजकर 20 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 4 जनवरी 2020 को 10बजकर 03 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है ।इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाने का नियम है उसी अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा घनिष्ठा नक्षत्र में स्थित कुम्भ राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 26 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 17 बजकर 04 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 27 जनवरी 2020 को 06 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है । इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाने का नियम है उसी अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र में स्थित कुम्भ राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 27 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 6 बजकर 49 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 28 जनवरी 2020 को 09बजकर 22 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है । इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाने का नियम है उसी अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा पूर्वभद्रापद नक्षत्र में स्थित कुम्भ राशि से मीन राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 28 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 09 बजकर 49 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 29 जनवरी 2020 को 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है । इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाने का नियम है उसी अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा उत्तराभद्रापद नक्षत्र में स्थित मीन राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 29 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 12 बजकर 14 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 30 जनवरी 2020 को 15 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है । इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाने का नियम है उसी अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
जिस समय चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में स्थित मीन राशि में प्रवेश करता है।यह गोचर दिनांक 30 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 12 बजकर 14 मिनट से प्रारम्भ होगा और दिनांक 31 जनवरी 2020 को 18 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।यह पंचक नक्षत्र है । इस समय घर के अन्दर लकड़ी लाना , चारपाई बनाना वर्जित है, मृत व्यक्ति के दहन क्रिया पांच पुतले कुशा, आटे के बनाने का नियम है उसी अनुसार दहन किया जाता है। कपड़ा खरीद, घर मे छत डलवाने नही चाहिए।
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पंचक नक्षत्र
2 . 3 जनवरी से 5 जनवरी 2020
गण्डमूल नक्षत्र
रेवती-अश्विनी, आश्लेषा-मघा एवं ज्येष्ठा - ये तीन नक्षत्र -युगल गण्डमूल के नाम से जाने जाते हैं।यहाँ दो-दो नक्षत्र जहाँ परस्पर मिलते हैं।मीन-मेष , कर्क-सिंह एवं वृश्चिक -धनु राशियों का मेल होता हैं। रेवती-अश्विनी की सन्धि पर मीन-मेष और आश्लेषा-मघा की सन्धि पर कर्क-सिंह का मेल , ज्येष्ठा-मूल की सन्धि पर वृश्चिक-धनु राशियों की सन्धि होती है।इस लिए इसे गण्डान्त कहाँ जाता है। सन्धि स्थल को कमजोर स्थान माना जाता है। यह एक राशि सन्धि स्थल माना जाता है।
3 जनवरी 2020 की सुबह 7बजकर 20 मिनट पर चँद्रमा रेवती नक्षत्र में स्थित मीन राशि मे गोचर करेगे।रेवती नक्षत्र गण्डमूल और पंचक दोनों में कार्यरत रहता हैं।मीन राशि मे चन्द्रमा का गोचर 4 जनवरी 2020 भारतीय स्टैंड समय पर 10 बजकर 05 मिनट 12 सेकेड रहेगा। यह एक शुभ नक्षत्र है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग कठिन, अविश्वसनीय और प्रतिकूल परिस्थितियों में मानसिक संतुलन और धैर्य रख सकते हैं। केवल अंतिम चरण में, गन्ध मुल्ला विपत्तिपूर्ण है। मूल निवासी कर्ण, उदर रोगों से पीड़ित है।
रेवती नक्षत्र पंचक और गण्डमूल संज्ञक नक्षत्र भी कहलाता हैं।इस नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं।भचक्र के अंतिम नक्षत्र के नाम मोक्ष ,आनन्द यानि सभी दुःखो एवं अभावों का नाश होना चाहिए था। धन सरीखी अस्थिर ,अनित्य, अस्थायी वस्तु को रेवती से जोड़ना अनुचित जान पड़ता हैं। कुछ विद्वान कहते है कि धन वैभव का अन्य नाम लक्ष्मी भी तो है। लक्ष्मी के आठ रूपो का वास इसी नक्षत्र में वास करते हैं।इसके साथ शुभ परिवर्तन लाने वाला मन जाता है। इस राशि के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं।नक्षत्रस्वामी बुध ग्रह विष्णु से सम्बंध है। मोह भंग के मनुष्यों को बहुत ही विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता हैं। कारण -अन्तिम नक्षत्र होने से यह गंडांत भी तो है।
अश्विनी नक्षत्र :- अश्विनी नक्षत्र :- 4 जनवरी 2020 को अश्विनी नक्षत्र भारतीय स्टैंड समय 10 बजकर 06 मिनट पर मेष राशि मे गोचर करेगे। 6 जनवरी 2020 अश्विनी नक्षत्र 02 बजकर 27 मिनट तक मेष राशि में रहेंगे।यह आकाश में तारा मण्डल का आरम्भ बिंदु होने से सभी कार्यो की शुरुआत को दर्शाता हैं।
मेष राशि के आरम्भ में पड़ने वाला अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक चिह्ण घोड़े का सिर मेष राशि के अंग सिर के समरूप ही है।
अश्विनी नक्षत्र वाले लोगों में सजने और सवँरने में विश्वास रखते है। ये लोग स्पस्ट वादी होते हैं। जल्दबाजी की वजह से शिक्षा पूरी नही कर पाते हैं।अश्विनीनक्षत्र एक साधन संपन नक्षत्र हैं विषम परिस्थितियों में भी आवश्यकता के अनुरूप साधन जुटा लेता हैं। इस नक्षत्र में एक अद्वितीय शक्ति का वास होता है।अपने कार्य पूर्ण की क्षमता होती हैं।
अश्विनी नक्षत्र का प्रथम चरण :- मेष राशि के शून्य अंश से 3 अंश 20 कला तक होने के कारण मेष राशि का प्रथम नवांश बनता हैं। इस पद के स्वामी मंगल ग्रह है जो जातक को साहसी, उत्साह एवं बल प्रदान करता हैं। जो कि उनको कर्मठ, ऊर्जावान तथा नेतृत्व के में सक्षम बनाता है। यह पद मूल संज्ञक नक्षत्र है जोकि पिता के हानिकारक होता हैं।
अश्विनी नक्षत्र का दूसरा पद :- द्वितीय पद मेष राशि मे 3' 20" से 6' 40" हैं। इस चरण के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। चंद्रमा की अति कामुक होता हैं सौंदर्य प्रिय होता हैं। संगीत , सुख साधनों से सम्पन्न होता हैं।
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3 . 9 जनवरी 2020 को शुक्र ग्रह मकर राशि में गोचर करेगे।
शुक्र ग्रह भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 02 बजकर 23 मिनट पर घनिष्ठा में स्थित मकर राशि मे प्रवेश करेंगे।इस समय शुक्र ग्रह अस्त चल रहे हैं।
चन्द्र कुंडली के पहले ,दूसरे, तीसरे, चौथे ,पांचवें, आठवें, नौवें, ग्याहरवें और बारहवें भाव से गुजरता शुक्र 8वे ,7वे, पहले, दसवे ,नोवे ,पचावें, ग्यारहवे,छठे और तीसरे भाव में क्रमशः गोचर में किसी अन्य ग्रह के न होने पर शुभ फल देता हैं। शुक्र एक राशि मे एक महीना रहता है। यह स्वाभाविक आकर्षक, प्रेम और लोगों को जोड़ने वाली भावनाओं का स्वामी हैं।
शुक्र ग्रह मकर राशि मे योगकारक होते हैं। राशि स्वामी शनि और घनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल है। मकर राशि दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करती है। पृथ्वीतत्व की राशि है। चन्द्र कुंडली के दसवें भाव में गोचर का शुक्र अशुभ प्रभाव देता हैं। जातक को मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, सम्पति को खोने का भय, नोकरी में मुश्किलें, सुसराल पक्ष से मतभेद, पत्नी के वैचारिक मतभेद , खून की कमी, मूत्राशय एवं सन्तानोउतप्ती प्रणाली संबन्धित रोग, मित्रता टूटना, नपुंसकता और सामान्य यौवन सम्बंध बनाने की अयोग्यता का कारण भी शुक्र ग्रह है।
शुक्र ग्रह पर शनि और मंगल का प्रभाव है जिसके कारण यह प्रधान नेतृत्व के लिए कष्टप्रद होगा। मंगल और राहु 6/8 स्थान पर स्थित हैं। सूर्य, शनि, बुध और केतु की स्थिति के कारण, उग्रवादी घटनाएँ और प्राकृतिक आपदाएँ होंगी जिनके कारण देश में नुकसान देखा जा सकता है। ग्रहों की स्थिति भी बर्फबारी और भूकंप का संकेत देती है।
मकर राशि एवं मकर लग्न और घनिष्ठा नक्षत्र वाले व्यक्तियो को प्रभावित होंगे। यदि शुक्र ग्रह की दशा एवं अन्तर दशा चल रही होगी।
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10 जनवरी 2020 को बृहस्पति मार्गी होंगे। भारतीय स्टैंड समय अनुसार रात्रि 10 बजकर 10 मिनट 33 सेकंड हैं। शुभ कार्य करने समय बिल्कुल उपयुक्त है। शिक्षा, अच्छी स्थिति,प्रसिद्धि, ज्योतिष ज्ञान, कानूनी मामले , धार्मिकता, मानसिक, नैतिक एवं शरीरिक विकास के कारक है। पुत्र, पति, गुरु, बुद्धिमता ,धन,समृद्धि, शानशौकत ,सम्मान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आश्लेषा नक्षत्र :- 12 जनवरी 2020 को चन्द्रमा आश्लेषा नक्षत्र में स्थित भारतीय स्टैंड समय पर 11बजकर 50 मिनट पर कर्क राशि मे गोचर करेगे। आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस समय मे उत्पन्न जातक शीघ्र ही प्रसन्न हो जाने वाले ,चतुर बुद्धि, शीघ्र ही बदल जाने वाले,दूसरों की अनुकृति करने वाले ,कलात्मक अभिरुचियों वाले होते हैं।आश्लेषा नक्षत्र का सम्बंध सर्प से है। इस नक्षत्र के जातकों में विशेष गुण हैं कि इन की ऊर्जा का सदुपयोग करना बहुत कठिन होता हैं।
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गण्ड मूल नक्षत्र
12 जनवरी 2020 भरतीय स्टैंड समय 11 बजकर 50 मिनट पर चन्द्रमा आश्लेषा नक्षत्र में स्थित कर्क राशि मे गोचर करेगे।यह गोचर 13 जनवरी 2020 भारतीय स्टैण्ड समय 9 बजकर 55 मिनट 6 सेकण्ड पर समाप्त होगा। नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं।इस नक्षत्र के कुछ पर्यायवाची शब्द है जैसे कि अहि, भुजंग, सार्दी ।इन सब शब्दों का सर्पो से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। इस नक्षत्र में स्वभाव में सर्प जैसे गुण और दूसरा कर्क राशि का अन्तिम छोर पड़ता हैं। इस मे दो कारणों से गण्ड बनता हैं ,नक्षत्र व राशि दोनों की समाप्ति होती हैं और जिसमे जन्म मृत्युदायक है तथा सांप मृत्यु का प्रतीक हैं। चन्द्र और बुध ग्रह में कोई मित्रता नही होती है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक क्रोधी, दुराचारी और अपने कहे शब्दों से मुकर जाने वाला होता हैं।
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गण्ड मूल नक्षत्र
12 जनवरी 2020 भरतीय स्टैंड समय 11 बजकर 50 मिनट पर चन्द्रमा आश्लेषा नक्षत्र में स्थित कर्क राशि मे गोचर करेगे।यह गोचर 13 जनवरी 2020 भारतीय स्टैण्ड समय 9 बजकर 55 मिनट 6 सेकण्ड पर समाप्त होगा। नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं।इस नक्षत्र के कुछ पर्यायवाची शब्द है जैसे कि अहि, भुजंग, सार्दी ।इन सब शब्दों का सर्पो से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। इस नक्षत्र में स्वभाव में सर्प जैसे गुण और दूसरा कर्क राशि का अन्तिम छोर पड़ता हैं। इस मे दो कारणों से गण्ड बनता हैं ,नक्षत्र व राशि दोनों की समाप्ति होती हैं और जिसमे जन्म मृत्युदायक है तथा सांप मृत्यु का प्रतीक हैं। चन्द्र और बुध ग्रह में कोई मित्रता नही होती है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक क्रोधी, दुराचारी और अपने कहे शब्दों से मुकर जाने वाला होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र का प्रथम चरण :- इस नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक /जातिका अपने धन का नाश करने वाला होता हैं।
2. आश्लेषा नक्षत्र का द्वितीय चरण :- आश्लेषा के दूसरे चरण में उत्पन्न जातक /जातिका अपने पिता के धन के लिए अनिष्टकारी होते है।
3. आश्लेषा नक्षत्र का तीसरा चरण :- इस चरण में पैदा होने वाले जातक /जातिका अपनी माता /सास के लिए अनिष्टकारी होते हैं।
4. आश्लेषा नक्षत्र का चतुर्थ चरण :- इस चरण में जन्म लेने वाले बालक /बालिका अपने पिता जी के लिए कष्टकारी होते है।
13 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय पर चन्द्रमा मघा नक्षत्र में स्थित सिंह राशि मे गोचर करेंगे।सिंह राशि भचक्र की पांचवी राशि के स्वामी सूर्य हैं। मघा नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं और नक्षत्र का पर्यायवाची शब्द पितृ या पूर्वजों को मघा नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना जाता हैं और दराँती की चिन्ह होता हैं। जिसका प्रयोग फसलों को काटने के लिए किया जाता है।मघा नक्षत्र को तारामंडल में 6 तारो से बनी आकृति मानते हैं। मघा नक्षत्र यदि शुभ प्रभाव में हो तो एक राजा समान धन वैभव, शक्तिशाली और बलवान होता हैं। हमारा शरीर ,परमात्मा का अभिन्न अंश आत्मा का सिंहासन ही तो होता हैं।राशि का पूर्वार्द्व देवगण तथा राशि का उत्तरार्ध पितर होरा कहलाता है।सिंह राशि मे मघा नक्षत्र का यह गोचर दिनांक 13जनवरी 2020 मध्य रात्रि 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
1. मघा नक्षत्र के प्रथम पाद :- इस नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाले बालक /बालिका माता /नाना पक्ष के लिए हानिकारक होते हैं।
2. दूसरे चरण :- पिता के लिए अनिष्टकारक होते हैं।
3-4 तीसरा एवं चतुर्थ चरण शुभकारी होता हैं।
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5 . 13 जनवरी 2020 को बुध ग्रह मकर राशि में गोचर करेगे।
13 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैण्ड समय 12 बजकर 19 मिनट पर बुध ग्रह उत्तराषाढा नक्षत्र में स्थित मकर राशि मे प्रवेश करेंगे। मकर राशि के स्वामी शनि ग्रह हैं।बुध इस समय दहन स्थिति में है। उत्तराषाढा नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं। बुध ग्रह जिस भी ग्रह के साथ बैठते उसी तरह का प्रभाव देते हैं। यह गोचर मकर राशि व मकर लग्न एवं उत्तराषाढा नक्षत्र वाले लोगों के विशेष महत्वपूर्ण हैं। ग्रह मण्डल में यह ग्रह युवा राजकुमार का प्रतीक हैं तथा वाणी, बुद्धि,विद्या, मित्र सुख ,मामा का कारक माना जाता हैं। इसके अतिरिक्त ज्योतिष,चिकित्सा,शिल्प,कानून, व्यवसाय, लेखन-वक कला -कौशल, गणित, अध्यापन, सम्पादन, प्रकाशन, मौसी,चित्र,क्रीड़ा, चाची,मामी आदि का विचार भी बुध से किया जाता है।
चन्द्र लग्न से 2 रे, 4वे, 6वे, 8वे ,10वे और 12 वे भावों में गोचर का बुध शुभ प्रभाव देता है। यदि 5वे ,3रे, 9वे ,1,8वे और 12वे भावों में चन्द्र के अलावा गोचर का कोई अन्य ग्रह न हो। बुध एक भाव मे लगभग एक महीने के लिए होता हैं। बुध जब अन्य भावों से गुजरता हुआ यह न केवल शक्तिशाली संकेत देता हैं। मानसिक एकाग्रता एव प्रथमिकताओ में आए परिवर्तन को भी दर्शाता है।
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6 . 15 जनवरी 2020 को सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे।
15 जनवरी 2020 से 12 फरवरी तक सन 2020 सूर्य मकर राशि मे गोचर करेगे। सूर्य उस समय उत्तराषाढा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। सूर्य का गोचर मकर राशि मे होगा और उसके स्वामी शनि ग्रह है। सूर्य और बुध की युति होगी। सूर्य का मकर राशि मे होने से किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए संकटापन्न रहेगा। द्वितीयेश शनि व्यय स्थान में होने पर शनिक्षेत्री शुक्र देश की गरिमा को बरकरार रखेगा। विपक्षीदल सत्ता पार्टी को परेशान करें।
सूर्य के द्वारा व्यक्ति की आत्मा, शरीर, निजी आकर्षक, शक्ति, दृढता,बल, शानशौकत,आत्म -निर्भरता, साहस, कड़वाहट, वृद्धावस्था,पशु, दुष्टता, भूमि, पिता, स्वाद, आत्मिक-विकास, नेत्र, मुख, यात्राएं, मानसिक पवित्रता, सिर की बीमारी, हडिड्यां, रक्त, स्वर्णाभूषण, जनकार्य, पूर्व दिशा, प्रमाणिकता क्रोध, दर्शिनिकता, राजनीतिक सत्ता, अधिकार -क्षमता, दवा विक्रेता एवं चिकित्सकीय योग्यता आदि को सूचित करता हैं ।
जब सूर्य चंद्र लग्न के तीसरे, छठे, दसवे या ग्यारहवे भाव गोचर करता और उस समय शनि के अलावा किसी भी अन्य ग्रह का इसके समानांतर वेध स्थानों 9वे, 12 वे, 4 , 5वे से गुजर नही होता तो इसका शुभ प्रभाव रहता हैं। सूर्य एक भाव में एक माह के लिए रहता है। सूर्य का गोचर बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर की ऊर्जा प्रणाली को इगीत करता है।
मकर राशि में सूर्य के गोचर का प्रभाव क्या होते है। उस समय जातक व्यापार में सफलता, अच्छा स्वास्थ्य, बड़े लोगों से सम्पर्क, सरकारी अधिकारियों में लाभ, पदौन्नति, इज्जत,मान सम्मान, इच्छा पूर्ति, खोए पद को प्राप्त करना, आध्यात्मिकता में विश्वास, मित्रों से सहयोग मिलता हैं।
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20 जनवरी 2020 को भारतीय स्टैंड समय पर चन्द्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित होकर वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे और यह गोचर 21 जनवरी 2020 को रात्रि 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। मंगल की राशि मे बुध के नक्षत्र का गोचर तो ठीक है लेकिन चन्द्र एव बुध तो आपस में शुत्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र का चिन्ह कान का झुमका है अर्थात उसकी आकृति दैवीय शक्ति से सम्पन्न रक्षा कवच माना जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि छतरी बनकर धूप एवं गर्मी, बरसात से रक्षा करती हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले बालक / बालिका में कुछ बनने / कुछ पाने की चाह प्रबल इच्छा होती है। ये जातक शरीरिक और मानसिक रूप से परिपक्वता पा लेता है। ज्येष्ठा नक्षत्र जातक में ईर्ष्या,क्रोध या प्रतिशोध की भावना प्रबल होती हैं। छोटी परेशानी को बढ़ा करके व्यक्त करना ,इनका स्वभाव हो जाता है। वैसे तो कर्मठ या क्रियाशील नक्षत्र होता हैं। नक्षत्र का सम्बंध शूद्र जाति से की जाती हैं। स्त्री संज्ञक नक्षत्र हैं। शरीर का दाहिना भाग ज्येष्ठा अंग कहलाता है।वात या वायु प्रधान नक्षत्र हैं।
.7 24 जनवरी 2020 को शनि ग्रह मकर राशि में गोचर करेगे।
24 जनवरी 2020 को, भारतीय समयानुसार सुबह 9.57 बजे शनि मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस समय शनि अपनी स्वयं की राशि में गोचर करेगा। वर्तमान में शनि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में स्थित है, नक्षत्र के स्वामी सूर्य ग्रह है। शनि और सूर्य के बीच पिता -पुत्र का सम्बंध हैं। लेकिन सूर्य और शनि के बीच में शत्रुता भी है। शनि इस समय दहन की स्थिति में है। भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 9बजकर 34 मिनट 8 सेकण्ड्स 30 जनवरी 2020 को मार्गी होंगे।
शनि ग्रह हमारे जीवन मे विशेष महत्व रखते हैं। शनि से आयु, रोग, मृत्यु, सेवक, लोहे के कारोबार, व्यापार, दुःख, विपत्ति के कारक माना जाता और शनि से कुटिलता, लोभ, मोह, राजदण्ड, सँन्यास, गूढ़रहस्य, उद्योग हानि, नोकर-चाकर ,पराधीनता, दुर्घटना, विश्वासघात, कानून, श्रम, नपुंसकता,जुआ,मदिरा, जल, काले वस्त्र, नीलम, शल्यचिकित्सा, शूल रोग, निराशा तथा लोहे के द्वारा धन लाभ, दरिद्रता के कारक है।
उत्तरषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्य स्वयं हैं। शनि दीर्घायु, दुश्मनी, आलस्य, अड़चनों, लाभ ,स्वास्थ्य खराब, परेशानी, गलतफहमी,दर्दशा, मृत्यु, अंगों की करूपता,संचालन, त्याग, वातरोग, वृद्धावस्था, मासपेशियों, क्रोध, थकान, कालारंग, लोहा, दुष्टता, कर्कशता, खेती, भय, अपमान ऊँचाई से गिरना, गरीबी, दुष्कर्म उधार, दुःख, संबंधी, व्यर्थघूमना, दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर हृदयता,जिद्दीपन, डर, हठात, अपवित्रता, नोकरी, सनक, निराशा, कारावास, पीना, जोखिम, भवन निर्माण आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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गण्डमूल नक्षत्र
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31 जनवरी, 2020 को दोपहर 01:30:00 बजे भारतीय मानक समय, बुध कुम्भ राशि में गोचर करेगा। बुध वर्तमान में धनिष्ठा नक्षत्र में स्थित है। मंगल धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी है। मकर राशि के स्वामी ग्रह शनि ग्रह हैं।मकर राशि में सूर्य और शनि का संयोजन सत्तारूढ़ पार्टी के लिए सार्वजनिक असंतोष होगा, जिसके कारण सत्तारूढ़ दल को जनता को संतुष्ट करने में परेशानी होगी। प्राकृतिक भूकंप के कारण जनता परेशान होगी जिसके कारण धन हानि के योग बनते दिखाई दे रहे हैं।


