4 अक्टूबर 2020 को भारतीय मानक समय 18 बजकर 45 मिनट पर मंगल ( वक्री) में मीन राशि मे गोचर करेगे। इस समय मंगल रेवती नक्षत्र में स्थित हैं।मंगल पर शनि की दृष्टि हैं। मंगल और सूर्य का समसप्तक योग बना रहे हैं और जिसके कारण जनांदोलन,तोड़ फोड़ एवं अग्निकाण्ड की घटनाऐं घटित होगी। देश के किसी राज्य में छत्रभंग होने के संकेत बन रहे हैं। देश मे कही दुर्भिक्ष,अग्निकाण्ड,युद्ध का भय ,उसके साथ-साथ शासन परिर्वतन के संकेत भी है। रोग ,अकाल,भुखमरी में बढ़ावा होगा।आर्थिकस्थिति,मुद्रा स्थिति में गिरावट के हालात बन रहे हैं।उसके साथ पर्वतीय क्षेत्रों में भूखलन, वर्षा के योग बन रहे है। पानी सम्बन्धित रोगों में वृद्धि होगी।
2. गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2020
3. पंचक नक्षत्र मास अक्टूबर 2020
4. 14 अक्टूबर 2020 को बुध ग्रह वक्री गति से तुला राशि मे गोचर करेगें।
14 अक्टूबर 2020 को भारतीय मानक समय 7 बजकर 12 मिनट बुध ग्रह वक्री होकर तुला राशि मे गोचर करेगे। इस दौरान बुध स्वाति नक्षत्र में स्थित हैं। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु है।शुक्र ग्रह राशि के स्वामी हैं। राहु-बुध-शुक्र का प्रभाव तो होगा ।स्वाती नक्षत्र के स्वामी राहु भी जातको पर डालेंगे।शनि की दृष्टि वक्री मंगल ग्रह पर है।पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया आदि मुस्लिम देशों में उग्रवाद ,भूकंप और प्राकृतिक प्रकोप से भारी जनहानि के योग बन रहे है।भारतवर्ष में कही -कही पर साम्प्रदायिक दंगे आर्थिक स्थिति की में गिरावट के संकेत बन रहे जिससे देश भुखमरी , अकाल की स्थिति, युवापीढ़ी रोजगार न मिलने से तंग आकर सरकार के विरोध में प्रदर्शन करेंगे। राजनैतिक पार्टियाँ देश के हित में सोच कर सत्ता प्राप्ति के विषय मे सोचेंगे।देश का वातावरण खराब होने के राष्ट्रपतिशासन लगना पड़ सकता है।
5. 17 अक्टूबर 2020 से दुर्गा नवरात्रि का प्रारम्भ होगा।24 अक्टूबर 2020 तक चलेगे।
6 23 अक्टूबर 2020 को शुक्र कन्या राशि मे गोचर करेंगे।
23 अक्टूबर 2020 को भारतीय मानक समय 8 बजकर 43 मिनट शुक्र ग्रह उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित होकर कन्या राशि मे गोचर करेगें।उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं।कन्या राशि के स्वामी बुध हैं। शुक्र कन्या राशि मे नीच स्थिति में होते है। यह वैश्य वर्ण, दुःस्वभाव वाली, सौम्य प्राकृति, पृथ्वीतत्व, दीर्घजीवी, रत्री जाति, मिश्रित रंग,सात्विक गुण वाली राशि होती हैं।दक्षिण दिशा में बलवान होती हैं। शुक्र ग्रह वृषभ,तुला राशि के स्वामी हैं।छठा स्थान मामा,सौतेली माँ, रोग,ऋण और शुत्रओ ,मुकदमों ,विदेश यात्राओं का होता हैं। शुक्र ग्रह प्रेम-प्रसंग और सौन्दर्य व आकर्षक के प्रतीक है।जलतत्व,अग्निकोण दिशा के स्वामी होता हैं।स्त्री,वाहन,काम, सुख,वीर्य, व्यापार,व्यभिचार, घर,मैथुन ,चित्रकला,संगीत, विवाह सुख के कारक है। शनि की दृष्टि मंगल, राहु की दृष्टि शुक्र, शनि-सूर्य -बुध पर है जिसके कारण प्राकृतिकआपदा,भूकंप,जल-वायु प्रकोप से संकेत दे रहा है।वायुयान दुर्घटना सर भारी हानि होगी।उत्तर-पश्चिम स्थानों पर अग्निकाण्ड के संकेत दे रहा है।शनि-मंगल की नीच सूर्य दृष्टि प्रधान नेता के कष्टप्रद हैं।