Tuesday, August 13, 2019

अक्टूबर 2019 की ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण घटनाएं

                गण्डमूल नक्षत्र

3 अक्टूबर 2019 को 12 घंटे बजकर 15 मिनट पर ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रारम्भ होगा।


4 अक्टूबर 2019 भारतीय स्टैंड समय 12 बजकर 23 मिनट तक वृश्चिक राशि मे रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र सबसे बड़ा नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस नक्षत्र की गणना दिव्य शक्ति के रूप में कई जाती हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक ,पिछले कर्मो के शुभ प्रभाव से धन -वैभव व सफलता पाता हैं। वैसे राक्षस गण की उपमा दी जाती हैं। यदि यह नक्षत्र पाप से पीड़ित हो तो  जातक अभिमान वंश धर्म विरुद्ध आचरण कर बैठते है। शुभ प्रभाव होतो जातक देवीय कृपा से पद ,प्रतिष्ठा, धन और यश प्राप्त करता हैं।ज्येष्ठानक्षत्र वायु प्रधान नक्षत्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र जातक यदि वायु सम्बन्धित रोग, पेट गैस तथा गठिया सरीखे रोगों से कष्ट पाते हैं।

1. ज्येष्ठा नक्षत्र का  प्रथम चरण में उत्पन्न जीव बड़े भाई  को अरिष्टकर होता हैं।


2 दूसरे चरण में उत्पन्न बालक /बालिका छोटे भाई के लिए अरिष्टकारी होता हैं।


3.ज्येष्ठा नक्षत्र तीसरे चरण में उत्पन्न माता के   अरिष्टकर होता हैं तथा


4.  ज्येष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण उत्पन्न बालक स्वयं के लिए शुभ नही होता हैं।



            2.   मूल नक्षत्र भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 4 अक्टूबर 2019 को 12 बजकर 24 मिनट पर धनु राशि मे प्रवेश करेंगे।


 5अक्टूबर 2019 को 13 बजकर 22 मिनट तक धनु राशि मे गोचर करेगे।मूल नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र कहलाता है। भचक्र के तीसरे तिहाई भाग का प्रथम नक्षत्र हैं।मूल नक्षत्र को महत्व प्रदान करने के लिए ही सभी तिहाई भाग के प्रथम व नवम नक्षत्र मूल संज्ञक माना जाता हैं। इस नक्षत्र का तापमान 30 हजार सेलशियस आंका गया हैं।इस नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं। मूल का अर्थ है पौधे की जड़ ,यानि केन्द्र बिंदु हैं।यह नक्षत्र अपने नाम द्वारा जाना जाता हैं। जड़ सैदव भीतर रहती हैं,अपनी गुप्त मनोभाव ,अव्यक्त इच्छाओ , गुप्त रहस्यपूर्ण है मूल नक्षत्र हैं।


                         

मूल नक्षत्र को स्वयं बृहस्पति जी ने आशीर्वाद दिया है।क्योंकि गुरु की मूलत्रिकोण राशि धनु ,जो काल  पुरूष का भाग्य स्थान हैं उसी शुभ  राशि मे मूल नक्षत्र विद्यमान हैं।  मूल नक्षत्र भारी उथल पुथल के बाद सत्य,समानता ,न्याय व अहिंसा की जड़ो को जमाता हैं। मूल नक्षत्र में वशिष्ट  गुण किसी भी बात तह तक पहुँचना ,समस्या का समाधान करने की शक्ति रखता हैं। कुछविद्वानों का मत हैं कि मूल नक्षत्र एक पुरूष नक्षत्र हैं,भगवानविष्णु जी के दोनों चरण के रूप में स्वीकृति दी है। मूल नक्षत्र वाले जातक घमंडी ,सबसे श्रेष्ठ मानने वाला, हठी,साहसी कार्य करने वाला होता हैं। अपने स्वामी केतु का असर भी दिखाई देता हैं।जातक बहुधा हिंसा, तोड़ फोड़ में भी रुचि रखता हैं।

   I.मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाला जातक अपने पिता के  आरिष्टकार होता हैं।


   2. मूल नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक अपनी माता के लिए अच्छा नही होता हैं।


    3. तीसरे चरण में जन्म लेने वाला। जातक स्वयं के अच्छा नही होता हैं।


    4.मूल नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक  अनिष्ट प्रद माना जाता हैं। मूल नक्षत्र की शांति व पूजन करवाने से सुख व समृद्धि प्राप्त करता हैं।


1 पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे पिता के लिए अशुभ होते हैं।
 द्वितीय पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माता के लिए अशुभ होते हैं।

 तृतीय पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चों को आर्थिक हानि का सामना करना पड़ेगा।
 चौथा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे परिवार और रिश्तेदारों के लिए शुभ होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र :- 14 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार चन्द्रमा अश्विनी नक्षत्र में स्थित मेष राशि मे प्रवेश करेगा। 15 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक मेष राशि मे गोचर करेगा।


 पहला चरण पिता के लिए अशुभ होता है। 2 और 3 चरण आम तौर पर अच्छे होते हैं। लेकिन चौथा चारण मूलनिवासी के लिए अशुभ है।

अश्लेषा नक्षत्र 22 अक्टूबर 2019 को सायं काल 16 बजकर 39 मिनट पर चन्द्रमा अश्लेषा नक्षत्र में स्थित कर्क राशि मे प्रवेश करेंगे। 23 अक्टूबर 2019 पर 15 बजकर 13 मिनट कर्क राशि मे गोचर करेगे।


आश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण: बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार होगा और वह प्रतिभाशाली होगा।
दूसरा पाडा: ऐसे लोग लालच और धोखाधड़ी के घोटालों में पारंगत होते हैं। कई विद्वानों की राय में, ऐसे लोग धन का नाश करते हैं।

तीसरा पाद: ऐसा व्यक्ति अपनी मां के लिए अशुभ होता है।
4 वा पाद: ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारी होता है।


 23 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय पर चन्द्रमा माघ नक्षत्र में स्थित सिंह राशि मे प्रवेश करेगा।24 अक्टूबर 2019 को 13 बजकर 18 मिनट तक सिंह राशि मे गोचर करेगे।


 1 पाद: इसमें जन्म लेने वाला बच्चा 5 महीने तक पिता के लिए अशुभ रहेगा।
 द्वितीय पाद से चतुर्थ पाद: इन पादों में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।


ज्येष्ठा नक्षत्र :- 30 अक्टूबर 2019 को चन्द्र ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित भारतीय स्टैंड समय 21 बजकर 59 मिनट पर वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेगा।31 अक्टूबर 2019 रात 21 बजकर 36 मिनट तक वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे।


  प्रथम पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे मातृपिता के लिए अशुभ होते हैं।
   दूसरा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे मातृ दादी के लिए अशुभ होते हैं।
   तीसरा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माता-पिता के लिए अशुभ होते हैं और माता के सह-जन्म होते हैं।
   चौथा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे सह जन्म के लिए अशुभ होते हैं।
   5 वा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे अपने लिए अशुभ होते हैं।
   6 वा पाडा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
    7 इस राशि में जन्म लेने वाले बच्चे अपने जीवनसाथी के लिए अशुभ होते हैं।
    8 वा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे अपने लिए अशुभ होते हैं।
 9 वाँ पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे पिता के लिए अशुभ होते हैं।

 10 वा पाद : - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माँ के लिए अशुभ होते हैं






   4 अक्टूबर 2019 को शुक्र ग्रह तुला राशि गोचर करेगे।

 अक्टूबर, 2019 शुक्र ग्रह 3 घंटे 50 मिनट में 50 सेकंड में तुला राशि में गोचर करेगा। वर्तमान में शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। मंगल चित्रा नक्षत्र का स्वामी है। इस गोचर की अवधि में तुला और आरोही वाले ये लोग प्रभावित होंगे। जिन लोगों का जन्म नक्षत्र चित्रा भी प्रभावित होगा। शुक्र तुला राशि का स्वामी है और साथ ही सातवें घर का आरोही। 7 वां घर विवाह, साझेदारी, पत्नी, पति शत्रु, सौतेले बच्चे, बॉस, दूसरा बच्चा, पैतृक भव्य पिता, भाइयों का पुत्र का है। वेन्यू शादी, सेक्स इच्छा, चांदी, आराम, अच्छे कपड़े, सौंदर्य, नृत्य, संगीत, सपने, सामग्री भव्य माता-पिता, पानी, प्रतिभा शराब, संबंध, मुकदमेबाजी, सेक्स जुनून या संघ, कूटनीति, चोर का वर्णन और सामाजिक बातचीत का प्रतिनिधित्व करता है।


            गोचर प्रभाव: - जब शुक्र 1, 2, 3, 4, 5 वें, 5 वें, 8 वें, 9 वें, 11 वें और 12 वें भाव में चंद्रमा से अच्छे परिणाम देता है, लेकिन 8 वें, 7 वें, 1, 10 वें, 9 वें में कोई ग्रह नहीं होना चाहिए , 5 वाँ, 11 वाँ, 6 वाँ, 3 वाँ मकान पत्राचार के होते हैं। इस बार, शुक्र 28 अक्टूबर, 2019 तक केवल 24 दिनों में पारगमन करेगा।



           7 वें घर में परिणाम: -
 शुक्र घरेलू स्तर पर दुःख देगा, घोटालों में शामिल होना, स्वास्थ्य के मामले, क्रोध, अतिरिक्त-वैवाहिक संबंध, धन की हानि, पत्नी के साथ समस्याएं, व्यापार साझेदार जहाज में संघर्ष, लेकिन दुष्ट महिलाओं के कारण कठिनाइयों के साथ जुड़ा हुआ है।
  स्वास्थ्य प्रभाव: - पित्ताशय, मूत्र संबंधी समस्याओं, गर्भाशय, मूत्र अंगों के संचालन में वृद्धि होगी।

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     पंचक नक्षत्र


भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 9 अक्टूबर 2019 को 09 बजकर 41 मिनट पर चन्द्रमा कुम्भ राशि मे धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

 9 अक्टूबर 2019 रात 23 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।उस समय पंचक नक्षत्र का प्रारम्भ होगा। धनिष्ठा नक्षत्र की तुलना भगवान शिव के डमरू के रूप में करते हैं।प्रभु की इच्छा ही जातक की इच्छा बनती है।अहंकार व अभिमान उसमे बाधा नही देते हैं। इस नक्षत्र की ऊर्जा प्राप्त कर जातक कठिन कार्य व श्रमसाध्य कार्य को सहज ढंग से निपटा लेता हैं। वाद्य यन्त्र बजाना सुखद अनुभव है। आठ वसुओं को धनिष्ठानक्षत्र का अधिष्ठाता देवता मानते हैं।जल, ध्रुव, सोम, धर, अनिल ,अनल,प्रत्यूष और प्रभास  हैं। पीठ व गुदा को धनिष्ठा नक्षत्र का अंग मानाजाता हैं। मेरुदण्ड का सम्बंध शनि व मकर राशि से जोड़ा जाता हैं।कुंडलिनी मूलाधार चक्र से सहस्रार मस्तिष्क के ऊपरी भाग पहुँचती हैं।


भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 9 अक्टूबर 2019 को 23 बजकर 13 मिनट पर चन्द्रमा कुम्भ राशि मे शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।


 11 अक्टूबर 2019 सुबह 2 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।यह दूसरा  पंचक नक्षत्र का प्रारम्भ होगा। शतभिषा नक्षत्र का अर्थ है सौ चिकित्सक, सौ औषधियां सौ उपचार-कर्ता जीवन मे जो रोग दुःख कष्ट, या पीड़ा है,उसको मिटाने के लिए दैवीय व्यवस्था में औषधि व उपकरण से सुसज्जितहैं ।वृत आकार वाला चक्र कहते है।रहस्य व गोपनीयता,सीमा व सुरक्षाको छिपा हुआ है । इस नक्षत्र में सभी समस्याओं सुलझाने के शक्ति होती है। सौ वैद्य ही इस नक्षत्र के स्वामी हैं। सभी प्रकार के दोष, दुर्बलता व रोगों का शमन करते हैं।  इस नक्षत्र वाले जातक सबसे अलग रहना पसंद करते हैं।वायु तत्व प्रधान होने से ,जातक चिनन्त,मनन व विश्लेषण करने कुशल होता हैं। नक्षत्र के स्वामी राहु हैं।

         11 अक्टूबर 2019 भारतीय स्टैंड समय पर 02 घण्टे 14 मिनट चँद्रमा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र स्थित कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे।


12 अक्टूबर 2019 सुबह 05 बजकर 09 मिनट तक कुम्भ /मीन राशि में गोचर करेगे।पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का अर्थ होगा पहला भाग्यशाली पावों वाला नक्षत्र । शुभ नक्षत्र हैं। कालपुरुष एकादश भाव कुम्भ राशि लौकिक कार्यो से क्लान्त मन, हानि-लाभ का लेखाजोखा करने केबाद विश्राम पाने के शैया पर जाना चाहता हैं।
   
          पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के दो चेहरे वाला व्यक्ति से दर्शाया जाता है। इसका एक चेहरा बहुत सौम्य,विनम्र, दयालु व परोपकारी व्यक्ति का है दूसरा चेहरा कठोर, निर्मम, क्रूर ,हिसा प्रिय तथा आतंकी होता हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक दिन में सामान्य और दूसरे क्षण विपरीतप्रभाव में दिखाई पड़ता हैं। ब्राह्मण वर्ण नक्षत्र,पुरूष सज्ञक नक्षत्र होता हैं।वायु दोष वाला नक्षत्र हैं। तीन पद कुम्भ, आखिर पद मीन राशि मे पड़ता हैं। मृतक संस्कार, कफ़न बनाने वाले व बेचने होते हैं।दाह संस्कार करने वाले पंडित, शल्य चिकित्सक होते है।आतंकवादी, मनोविश्लेषक तथा कालाजादू करने वाले होते है। मनुष्य गण के व्यक्ति होते हैं। विवाह, यात्रा, संभोग या सरकारी अधिकारियों से मिलने के लिए पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र वर्जित हैं।


          12 अक्टूबर 2019 भारतीय स्टैंड समय पर 05 घण्टे 10 मिनट चँद्रमा उत्तरभाद्रपद नक्षत्र स्थित मीन राशि में प्रवेश करेंगे। 


13 अक्टूबर 2019 सुबह 07 बजकर 53 मिनट तक  मीन राशि में गोचर करेगे।उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का अर्थ होगा शुभ  पावों वाला बाद नक्षत्र । शुभ नक्षत्र हैं। कालपुरुष द्वादश भाव मीन  राशि निद्रा सुख के लिए शैया पर जाना चाहता हैं। मोक्ष से माना जाता हैं।    मीन राशि को प्रायः सभी ने मोक्ष देने वाली राशि माना जाता हैं।द्वादश भाव तो निद्रा व शयन सुख का भाव है।उत्तरभाद्रपद को शयन शैया के पिछले पैर मानना ही उचित हैं। सोया व्यक्ति शव सरीखा देखने -सुनने में अक्षम व निश्चेष्ट होता हैं। इस नक्षत्र की तुलना मेरुदण्ड के मूल स्थान गुदा के समीप सुप्त कुंडलिनी से करते हैं। मीन राशि  के ह्रदय में स्थित शनि का नक्षत्र उत्तरभाद्रपद तो कुंडलिनी शक्ति जाग्रत कर ज्ञान व वैराग्य प्राप्ति की बात कहता हैं।
                                                                  



                                              
 उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के जातक एक श्रेष्ठ सलाहकार बनता हैं।यह नक्षत्र जल तत्व  प्रधान मीन राशि मे होने से आग बुझाने के लिए सक्षम होता हैं। यह जातक विज्ञान,प्रौद्योगिकी,ज्योतिष, अंकशास्त्र,योग,ध्यान व आध्यात्म विज्ञान में सफलता प्राप्त करता हैं।  कुछ कार्य  हैं:-जैसे कि विवाह, घर व कार्यलय का के निर्माण कार्य, वित्तिय लेन देन का कार्य, संभोगसुख, गृहप्रवेश,नामकरणसंस्कार सभी कार्य शुभ माने जाते हैं। वर्जित कार्य :- यात्रा करना, मुकदमादायर करना, शुत्र पर आक्रमण करना, जुआ व सट्टा लगना, धन उधार देने वर्जित हैं।
रेवती नक्षत्र  :- 12 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय 7 घण्टे 53 मिंट पर चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में स्थित मीन राशि मे प्रवेश करेगा। 13 अक्टूबर 2019 को 10बजकर 18 मिनट तक मीन राशि मे गोचर करेगे। रेवती का अर्थ है। धन धान्य से परिपूर्ण राशि भचक्र अन्तिम राशि अंतिम नक्षत्र हैं। भगवान से प्राप्त योग, सत्य, सौभाग्य तथा आठों लक्ष्मी का समावेश हैं। रेवतीनक्षत्र का सम्बंध आत्मज्ञान व मोक्ष से भी हैं। रेवती नक्षत्र की आकृति मृद्गन बनाते है।


                     18 अक्टूबर 2019 को सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे।



      सूर्य ग्रह भारतीय समय के अनुसार 03 बजकर 37 मिनट 40 सेकण्ड पर तुला राशि में गोचर करेंगे | इस समय सूर्य चित्रा नक्षत्र में स्थित हैं | चित्रा नक्षत्र  स्वामी मंगल ग्रह है | सूर्य के गोचर  प्रभाव तुला लग्न और राशि  और चित्रा नक्षत्र वाले व्यक्तियों पर होगा | सूर्य का यह गोचर एक महीने का होता है | तुला राशि में सूर्य नीच अवस्था में होते हैं | जिस समय सूर्य गोचर करते हैं , जन्म चन्द्रमा से 3 , 6 ,10 और 11 वे घरो में अच्छा प्रभाव देते है यदि 9 वे , 12 वे 4 और 5 वे घरों में शनि के इलावा कोई ग्रह न स्थित हो | सूर्य का यह गोचर बहुत महत्वपूर्ण होता है | हमारे शरीर में ऊर्जा  के स्रोत्र है | यह हमारी भावनाओ , स्वास्थ्य ,और  शक्ति प्रदान करते है |

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अक्टूबर, 7, 2019 (शुक्ल पक्ष) तक 29-सितंबर, 2019 को नवरात्रि का आयोजन

नवरात्रि तिथि तिथि तक
29-9-2019 प्रथम प्रतिपदा 20-16
30-9-2019 द्वितीय द्वितीया 16-54
01-10-2019 तीसरी तृतीया 14-00
02-10-2019 4 चतुर्थी 11-45
03-10-2019 5 वीं पंचमी 10-16
04-10-2019 6 वीं षष्ठी 09-38
05-10-2019 7 वीं सप्तमी 09-53
06-10-2019 8 वीं अष्टमी 10-57
07-10-2019 9 वीं नवमी 12-40

            24 अक्टूबर 2019 को बुध ग्रह वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे


             24 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 03 बजकर 40 मिनट पर बुध ग्रह वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेंगे। इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। बुध ग्रह विशाखा नक्षत्र में स्थित हैं। विशाखा नक्षत्र के स्वामी भी मंगल ग्रह है। वृश्चिक राशि एक जल, शीर्षोदय ,स्थिर राशि है। उत्तर दिशा का प्रतिनिधि करती है। बुध ग्रह यहाँ पर अपना  अच्छा प्रभाव नही देते हैं। बुध हमारे, ज्ञान, शिक्षा, मित्रों, व्यवसाय और   व्यपारी, गणित,साइंटफिक सीखने,भाषण, मामा व मामियों , काला जादू, वेद,पुराण, बड़े चचेरे भाई का प्रितिनिधित्व करता हैं।

                 वृश्चिक राशि एवं विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर प्रभाव    जिन व्यक्तियों का जन्म वृश्चिक राशि एव विशाखा नक्षत्र में हुआ है। उन पर बुध ग्रह प्रभाव होगा।जिस समय बुध ग्रह किसी राशि मे गोचर करते हैं जन्म राशि  यानि चन्द्रमा जहाँ स्थित हो । उससे 2, 4, 6, 8, 10, और 11 भावों में गोचर का शुभ प्रभाव देता है यदि 5,3,9,1,8 और 12 भावों में चन्द्र के अलावा गोचर का अन्य ग्रह न हो। गोचर में बुध हमारी मानसिक एकाग्रता एवं प्राथमिकताओ में परिवर्तन को भी दर्शाता हैं। यदि बुध जन्मकुंडली या गोचर में पाप प्रभाव में न हो। विचारों में स्पष्टता देता हैं।यदि बुध वक्र गति में घटनाओं आशा के विरुद्ध पलट जाती है। यह प्रभाव तभी दिखलाई देते हैं यदि बुध दशा एव अन्तर दशा चल रही हो।
आठवें भाव गोचर का प्रभाव  :-  आठवें भाव में बुध का गोचर शुभ होता हैं। घर मे शिशु का जन्म, धन के स्त्रोतो में वृद्धि, उच्च अधिकारियों से अनुकूलता, शत्रुओं पर विजय, सट्टे से लाभ, नए घर की प्राप्ति, आर्थिकविकास होता है।                         knowtransit.blogspot.com

                  28 अक्टूबर 2019 को शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।

       
28 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय अनुसार 09 बजकर 06 मिनट पर शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेंगे। इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। शुक्र ग्रह विशाखा नक्षत्र में स्थित हैं। विशाखा नक्षत्र के स्वामी भी मंगल ग्रह है। वृश्चिक राशि एक जल, शीर्षोदय ,स्थिर राशि है। दक्षिण-पूर्व दिशा का प्रतिनिधि करती है। शुक्र ग्रह यहाँ अच्छा प्रभाव नही देते हैं। शुक्र ग्रह हमारी शादी, पत्नी,  खुशियों ,सुख साधन, विलासिता, यौन इच्छा,सुंदरता, नाना-नानी, कर्मा, योग्यता, शराब, अच्छे वस्त्र,  सास-सुसर ,सुगधित पदार्थों का प्रतिनिधितव करता हैं।

          वृश्चिक राशि एवं विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर प्रभाव    जिन व्यक्तियों का जन्म वृश्चिक राशि एव विशाखा नक्षत्र में हुआ है। उन पर शुक्र ग्रह प्रभाव होगा।जिस समय शुक्र ग्रह किसी राशि मे गोचर करते हैं जन्म राशि  यानि चन्द्रमा जहाँ स्थित हो । उससे 1,2,3, 4, 5, 8, 9,11 और 12 भावों में शुक्र ग्रह गोचर का शुभ प्रभाव देता है यदि 8,7,1, 10,5,11,6, 3 भावों में चन्द्र के अलावा गोचर का अन्य ग्रह न हो। गोचर में शुक्र हमारी प्रेम ,मनोभावों,  धार्मिकभावनाओं एवं शक्तियों बल प्रदान करता हैं। । यदि शुक्र जन्मकुंडली या गोचर में पाप प्रभाव में न हो। धार्मिक स्पष्टता देता हैं।यदि  शुक्र  खुशियां,सामाजिक प्रोग्राम, मनोरंजन करने के लिए सक्षम बनाता है।यह शुक्र ग्रह नए सम्बन्ध ,आर्थिकविकास, वाहन, ऊँचाई देता है। यदि शुक्र दशा एव अन्तर दशा चल रही हो।
                आठवें भाव शुक्र ग्रह के गोचर का प्रभाव  :-  आठवें भाव में शुक्र का गोचर शुभ होता हैं। जीवनसाथी के द्वारा धन की वृद्धि होती हैं।, प्रेमके सम्बंध बनता हैं।, जिन व्यक्तियों की शादी की आयु हो गई उनकी शादी भी करवा देता हैं।नए भूमि अधिग्रहण करता हैं।मित्रो से सहयोग करता हैं।, सुख साधनों में वृद्धि होती है। स्वास्थ्य लाभ और बीमारियों से लड़ने की सक्षमता प्राप्त करने शक्ति देता हैं।
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Sunday, August 4, 2019

सितम्बर 2019 में ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण घटनाएं

                 Astrological events

    1. 10 सितंबर 2019 को शुक्र का कन्या राशि में गोचर:


 10 सितंबर, 2019 को, शुक्र कन्या राशि में 00 मिनट 16 मिनट IST पर प्रवेश करेगा। शुक्र उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित है। शुक्र अपनी नीच राशि मे स्थित है,1,2,3, 4, 5 वें, 8 वें, 9 वें, 11 वें, या 12 वें घरों में शुक्र के चंद्रमा का गोचर शुभ परिणाम देगा, बशर्ते कि 8 वें, 7 वें, 1 वें, 10 वें, 9 वें, 5 वें, 11 वें, 6 वें और तीसरे स्थान पर हों संबंधित पदों में कोई अन्य ग्रह स्थित नहीं है। शुक्र इस राशि में लगभग एक महीने तक रहेगा। शुक्र आकर्षण, आकर्षण, प्रेम, भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है जो बिना किसी प्रयास के लोगों को एक साथ लाता है। इसका पारगमन आध्यात्मिक रूप से कुछ उच्च बनाता है। यह एक सामाजिक ग्रह है और सामाजिक उत्सवों, पार्टियों, मनोरंजन, मौज-मस्ती आदि गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है। मूल निवासी शुक्र से धन, वैभव और / या वाहन प्राप्त कर सकते हैं।

  गोचर का प्रभाव: -

 जब शुक्र का जन्म चंद्रमा से 6 वें घर में गोचर अशुभ प्रभाव देता है। यह प्रतिकूल परिणाम देता है जैसे कि अपमान, मृत्यु, झगड़े, मुकदमेबाजी, दूसरों के साथ दुश्मनी, प्रतिकूल परिस्थितियों से परेशानी, जीवनसाथी और संतान से धन की हानि, आर्थिक नुकसान, शत्रुओं से परेशानी, व्यापार में साझेदारों से विवाद, जीवनसाथी की बीमारी, प्रवणता यौन रोगों और मूत्र संक्रमण या गुर्दे की समस्याओं से पीड़ित होने के लिए। मन अस्थिर रहेगा, बुरे साथ की ओर आकर्षित हो सकते हैं जिसके कारण भारी खर्च के साथ-साथ मान सम्मान में भी हानि हो सकती है। यदि वेन्यू अधिक बुरी जगह पर स्थित है, तो यह कारावास भी हो सकता है।
                               
                                                   

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           2. सितंबर को 11,2019 बुध कन्या राशि में गोचर करेगा


  11 सितंबर, 2019 को 04 बजकर 00 मिनट 05 सेकंड पर भारतीय स्टैंड टाइम के अनुसार, बुध कन्या राशि में प्रवेश करेगा। इस समय बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित है। यह बुध का अपना चिन्ह है। बुध का गोचर उन लोगों के लिए लाभकारी होगा जिनके बुध 2, 4, 6, 8 वें, 10 वें या 11 वें भाव में प्रवेश कर रहे हैं, इस शर्त के साथ कि उनके संगत 5, 3, 9 वें, 1, 8 वें और 12 वें, घर नहीं हैं चंद्रमा को छोड़कर कोई भी ग्रह। अध्ययन के लिए पारे का पारगमन एक महत्वपूर्ण विषय है। इसका पारगमन मानसिक परेशानीऔर मूल निवासी की प्राथमिकताओं में परिवर्तन के शक्तिशाली संकेतक देता है। बुध भी अपने पारगमन के दौरान संचारित संचार को इंगित करता है

गोचर का प्रभाव: 

- जन्मकालीन चन्द्रमा से 6 वें भाव से बुध का गोचर शुभ है। व्यक्ति को अच्छा भोजन, धन और कपड़े, साहस, उच्च शिक्षा, आनंद और खुशी, लोकप्रियता मिलती है, बुद्धिमत्ता, समृद्धि, सर्वोत्तम अधिकार, मानसिक शांति की उच्च गुणवत्ता प्रदर्शित करते हैं, अच्छा संगीत और लेखन में दक्षता प्राप्त करते हैं, वित्तीय सहायता, मानसिक संतुष्टि में सुधार करते हैं, दुश्मनों पर जीत, अधिकार के साथ-साथ अधीनस्थों के बीच अच्छे संबंध, दूसरों के प्रति जिम्मेदार व्यक्ति की सराहना।
                                                   

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         3. श्राद्ध पक्ष 13 सितंबर 2019 से शुरू होकर 28 सितंबर 2019 तक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में किए गए दान से पितरों की आत्मा की तृप्ति होती है।

  श्राद्ध पक्ष की शुरुआत, 2019: -

 इस वर्ष में श्राद्ध  का महीना 13-9-2019 से शुरू होकर 28-9-2019 को समाप्त होगा। उन्हें पित्तर का दिन भी कहा जाता है। बहू को ससुर का विशेष ध्यान रखना चाहिए। श्राद्ध प्रकरण में कहा गया है कि पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। श्राद्ध पूरी श्रदा के साथ करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध के सभी साधनों को जुटाने में असमर्थ है, तो वह अपनी भक्ति के साथ अपने पूर्वजों को भी संतुष्ट कर सकता है। पिता सभी जानते हैं और सभी परिस्थितियों को समझते हैं क्योंकि वे बहुत दयालु हैं।
श्राद्ध कर्म में हवन, पिंडदान और तर्पण आदि शामिल हैं। संस्कार आत्मा की शांति के लिए हैं। उन्हें श्राद्ध कर्म कहा जाता है। हमारे पूर्वज और पूर्वज, जब मृत्यु के बाद भी शांति नहीं है, तो वे इस दुनिया में पाए जा सकते हैं। उस कारण से एक पिता का दोष है। यदि वह कोई कार्य नहीं करता है या श्राद्ध पख में अपनी मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म नहीं करता है और हमारे जीवन को अशांति और कठिनाइयों को छोड़ देता है। हमारे बच्चों की कुंडली में आने से डरावने दोष आ जाते हैं। वे अपने जीवन में बाधाएं लाते हैं। पितृदोष, अपहरण, पारिवारिक रोग, दरिद्रता, मानसिक अशांति, हर समय घर में झगड़े, धन के बाद भी गरीबी, हर बीमारी घर पर रहना।



जब कोई व्यक्ति दुनिया में पैदा होता है, तो वह तीन प्रकार के ऋण लेकर आता है। पहला ऋण देव ऋण है, दूसरा ऋषि ऋण है, तीसरा पिता ऋण है। श्राद्ध पक्ष पूर्णिमा से शुरू होता है। यह वर्ष 13 सितंबर 2019 से होगा। यदि हम श्राद्ध कर्म ठीक से करते हैं, तो जातक सभी प्रकार के ऋणों से मुक्त हो सकता है। जातक को आत्मा के पिता की आत्मा की शांति, अपने पूर्वजों की शांति के लिए मन, कर्म और वचन के संकल्प के साथ पूरी श्रद्धा के साथ जप करके अपना आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए, अगर उसे तिथि का कोई ज्ञान नहीं है । २०१ ९ को दान, सुअर, हवन आदि से करना चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद, स्थूल शरीर को शरीर से अलग कर दिया जाता है। उसी स्थिति में, मौत को बुलाया जाता है। मृत्यु के बाद भी, पांच तत्वों में घुलने के बाद भी, आत्मा जीवित रहती है। एक वर्ष के लिए, रोगाणुओं का कोई नया शरीर नहीं है। इस दौरान उस व्यक्ति विशेष के लिए ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।
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4.        17 सितंबर 2019 को सूर्य कन्या राशि में गोचर


17 सितंबर 2019 को सूर्य कन्या राशि में 15 बजकर 11 मिनट 20 सेकंड IST पर गोचर करेगा। सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित है। इसके स्वामी सूर्य हैं। सूर्य 3, 6, 10 वें और 11 वें शुभ फल देता है, जबकि दूसरा चंद्रमा 1,2,4,5,7,8,9 और 12 वें स्थान पर है। बाकी के सूर्य का गोचर अशुभ फल देने वाला माना जाता है। यदि गोचर में 6 वें स्थान पर सूर्य है, तो सभी वांछित, धन लाभ, सफल, अच्छी प्रशासनिक क्षमताओं और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध की सफलता। सूर्य-बुध-वीनस 6 वें भाव में स्थित है, सूर्य-बुध से बुद्ध-आदित्य योग शुभ बनते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के लिए खराब रहेगा। इस परिवर्तन के दौरान, राजनीतिक नेता का एक पद खाली हो जाएगा।

  जिस व्यक्ति ने कन्या राशि, कन्या राशि में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लिया है, वह अपने सभी शत्रुओं पर हावी रहेगा। वे अपने बाधित कार्य को हल करने में सक्षम होंगे। जो लोग बीमारियों से पीड़ित थे, वे बीमारी से ठीक हो जाएंगे। कर्मचारी अपने क्षेत्र में सुधार करेंगे। यह एक सामान्य शांति होगी। नाम, प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त होगा। बकाया कर्ज चुकाएंगे। ये चीजें तब होती हैं, जब इस गोचर के दौरान सूर्य दशा / अंतर दशा चल रही होगी।
                             

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   20 सितंबर 2019 को शनि मार्गी होंगे।
    20 सितंबर, 2019 को, 11 बजे 01 मिनट आईएस पर, शनि प्रोवो तारामंडल में स्थित मार्गी होगा। इसके स्वामी शुक्र हैं। धनु राशि में नवम शनि के नाम से जाना जाता है। यह इस घर में अशुभ फल देता है। जिन व्यक्तियों का जन्म धनु या धनु राशि में हुआ है और प्रोव शाद नक्षत्र में जन्म हुआ है वे इस गोचर काल में प्रभावी हो सकते हैं। शनि अपने पुरुषवादी स्वभाव को बहुत खो देता है। यह एक सुसंस्कृत व्यक्ति को अच्छी तरह से व्यवहार करता है, शांत करता है, सभी धर्मियों द्वारा सम्मानित किया जाता है, आगे की ओर और खतरों से मुक्त करता है। नवम भाव धर्म से संबंधित है, ईश्वर के प्रति समर्पण, दर्शन एक विश्वास धार्मिक अनुष्ठान, भाग्य समृद्धि, शिक्षक, गुरु, पिता, अंतर्ज्ञान और पूर्वजन्म, पिछले धर्म के आचरण, लंबी यात्रा और विदेशी



 5.              25 सितम्बर 2019 को मंगल ग्रह कन्या राशि मे गोचर

1. 25 सितंबर, 2019 को 07 बजकर 54 मिनट 40 सेकंड पर IST, मंगल कन्या राशि में प्रवेश करेगा। इस समय मंगल उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित है। 3, 6, या 11 वें में मंगल का गोचर, चन्द्रमा से घर के लिए लाभकारी होगा, बशर्ते कि क्रमशः 12 वें, 5 वें और 9 वें स्थान किसी भी अन्य ग्रहों के गोचर से मुक्त हों। मंगल का पारगमन बहुत महत्वपूर्ण है। मंगल 45 दिनों के लिए एक  राशि   है। मंगल एक मजबूत ग्रह है और यह व्यक्ति को अपनी ऊर्जा के साथ बाहरी दबाव को सहन करने के लिए मजबूत बनाता है। मंगल एक उग्र ग्रह है। यह गुस्सा, दुर्घटना, चोट, सर्जरी, जलता हुआ बुखार, उच्च रक्तचाप और संक्रमण देता है। यदि मंगल छठी राशि में प्रवेश कर रहा है, अर्थात, कन्या शुभ परिणाम देता है। अच्छे प्रभावों में अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक, भोग के लाभ, अनाज, धन, प्रसिद्धि और सुख, समृद्धि शामिल होंगे, धर्मार्थ कार्य, शत्रुओं का विनाश, स्वतंत्रता पुरानी बीमारी, मुकदमों में सफलता, कृषि भूमि से आय, विवाह की संभावना अविवाहित, बच्चे का जन्म, इच्छाओं की पूर्ति।

.मंगल ऊर्जा देता है और यह एक व्यक्ति के जीवन को सक्रिय करता है। इस ऊर्जा का उपयोग विभिन्न वातावरणों से बाहरी दबाव के क्षेत्रों में गोपनीयता बनाए रखने के लिए किया जाता है ताकि यह स्थिति बना रहे।
    मंगल अपने शत्रुओं के संकेत में गोचर करेगा। मंगल का प्रवेश तात्विक पृथ्वी संकेत में है। प्रकृति, दक्षिण दिशा, क्रूर ग्रह और क्रूर राशि।
गोचर का प्रभाव

सूर्य और बुध बुधादित्य योग बना रहे हैं। सूर्य-मंगल-शुक्र पर शनि की विशेष दृष्टि है इस कारण से, प्रसिद्ध व्यक्ति  त्रासदी का सामना करेंगे और उच्च पद को खाली करेंगे। मंगल, शनि को प्रभावित कर रहा है जिसके कारण पाकिस्तान, चीन और कोरिया को परेशान करने वाली स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

                                                 

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.6.                          गंड मूल नक्षत्र

1.ज्येष्ठा नक्षत्र: -

 यह 6 सितंबर, 2019 को शुरू होगा, जब चंद्रमा 04:09 मिनट IST पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा और 7 सितंबर 2019 को 04:57:18 IST तक यहां रहेगा।
 यह नक्षत्र दस समान भागों में विभाजित है।
   प्रथम पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे मातृपिता के लिए अशुभ होते हैं।
   दूसरा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे मातृ दादी के लिए अशुभ होते हैं।
   तीसरा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माता-पिता के लिए अशुभ होते हैं और माता के सह-जन्म होते हैं।
   चौथा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे सह जन्म के लिए अशुभ होते हैं।
   5 वा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे अपने लिए अशुभ होते हैं।
   6 वा पाडा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
    7 इस राशि में जन्म लेने वाले बच्चे अपने जीवनसाथी के लिए अशुभ होते हैं।
    8 वा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे अपने लिए अशुभ होते हैं।
 9 वाँ पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे पिता के लिए अशुभ होते हैं।

 10 वा पाद : - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माँ के लिए अशुभ होते हैं

ii) मूल नक्षत्र:

 7 सितंबर 2019 को चंद्रमा मूला नक्षत्र में स्थित है और धनु राशि में प्रवेश करेगा। यह 04:57:18 IST पर होगा। यह 8 सितंबर 2019 को 06:28:47 IST तक रहेगा।

इस नक्षत्र को 4 बराबर भागों में विभाजित किया गया है।
मूला गंड मूल नक्षत्र चंद्रमा में चंद्रमा के प्रवेश के साथ शुरू होगा
1 पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे पिता के लिए अशुभ होते हैं।
 द्वितीय पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माता के लिए अशुभ होते हैं।

 तृतीय पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चों को आर्थिक हानि का सामना करना पड़ेगा।
 चौथा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे परिवार और रिश्तेदारों के लिए शुभ होते हैं।

iii) रेवती नक्षत्र: 

यह 16 सितंबर, 2019 को शुरू होगा। चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेगा। यह 01: 44: 12 बजे होगा। यह 04:21 IST सितंबर, 17,2019 तक यहां रहेगा। यह एक शुभ नक्षत्र है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग कठिन, अविश्वसनीय और प्रतिकूल परिस्थितियों में मानसिक संतुलन और धैर्य रख सकते हैं। केवल अंतिम चरण में, गन्ध मुल्ला विपत्तिपूर्ण है। मूल निवासी कर्ण, उदर रोगों से पीड़ित है।

iv) अश्विनी नक्षत्र:

 यह 17 सितंबर 2019 को शुरू होगा, यह 04:22 मिनट IST पर होगा। यह 06:43:35 IST 18 सितंबर, 2019 तक रहेगा। चंद्रमा मेष राशि में प्रवेश करेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सुंदर, बुद्धिमान और व्यवहार कुशल होते हैं। यह गण्डमूल नक्षत्र है। पहला चरण पिता के लिए अशुभ होता है। 2 और 3 चरण आम तौर पर अच्छे होते हैं। लेकिन चौथा चारण मूलनिवासी के लिए अशुभ है।

v) अश्लेषा नक्षत्र:


                              यह 25 सितंबर, 2019 को आधी रात को 00: .52: 31 IST पर शुरू होगा और 26 सितंबर, 2019 तक चलेगा। यह 06: .39: 49 IST के लिए इस संकेत पर रहेगा।
 एक बच्चे का जन्म:
आश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण: बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार होगा और वह प्रतिभाशाली होगा।
दूसरा पाडा: ऐसे लोग लालच और धोखाधड़ी के घोटालों में पारंगत होते हैं। कई विद्वानों की राय में, ऐसे लोग धन का नाश करते हैं।

तीसरा पाद: ऐसा व्यक्ति अपनी मां के लिए अशुभ होता है।
4 वा पाद: ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारी होता है।

vi) माघ नक्षत्र: -

 यह तब शुरू होगा जब चंद्रमा 26 सितंबर, 2019 को शाम 06.39: 50 IST पर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। यह 27 सितंबर, 2019 को 04:00:28 IST पर इस साइन में रहेगा
 1 पाद: इसमें जन्म लेने वाला बच्चा 5 महीने तक पिता के लिए अशुभ रहेगा।
 द्वितीय पाद से चतुर्थ पाद: इन पादों में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।


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7. पंचक नक्षत्र 


    12 सितंबर, 2019 को पंचक नक्षत्र का प्रारंभ:

प्राचीन भारतीय ज्योतिष विशेष नक्षत्रों पर आधारित रहा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के मुहूर्तों की गणना किसी विशेष क्षण में नक्षत्रों की स्थिति से ही की जाती है। पंचक नक्षत्र हैं जिनका मुहूर्त की गणना में अत्यधिक महत्व है। पंचांग बनाने वाले नक्षत्र धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र हैं। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के समय, सबसे पहले, इन नक्षत्रों को माना जाता है। इन नक्षत्रों में, कोई भी पवित्र कार्य निषिद्ध है। दक्षिण दिशा में यात्रा करना, एक झोपड़ी, एक घर, दुकान में एक छत बनाना, ईट या ईंटें बनाना, बांस या ईंटों की दीवार बनाना, तांबा, लोहा, पीतल, लकड़ी आदि इकट्ठा करना, कपड़े खरीदना, छत का निर्माण करना, अंतिम संस्कार करना। पेनकेक्स के दौरान अशुभ माना जाता है।

12 सितंबर 2019 को होने वाले पंचक नक्षत्र हैं:

(a) धनिष्ठा नक्षत्र 12 सितंबर, 2019 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से शुरू होगा। चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेगा और यह 13 सितंबर 2019 को 16 मिनट 57 मिनट IST तक रहेगा।


(b) शतभिषा नक्षत्र कुम्भ राशि में चंद्रमा के प्रवेश के साथ १३ सितंबर, २०१ ९ को शुरू होगा। यह १६ घंटे और ५ 58 मिनट के आईएसटी पर शुरू होगा और १ ९ घंटे और ५ 58 मिनट तक चलेगा और १४ सितंबर २०१ ९ को IST होगा।


(c) पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र 14 सितंबर को मीन राशि में चंद्रमा के प्रवेश के साथ शुरू होगा। यह 19 घंटे और 59 मिनट IST पर शुरू होगा और 10 घंटे और 02 मिनट, 16 सितंबर, 2019 तक IST तक चलेगा।


(d) उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र मीन राशि में चंद्रमा के प्रवेश के साथ शुरू होगा। यह 14 सितंबर 2019 को 10 घंटे 03 मिनट और IST से शुरू होगा। यह 16 सितंबर 2019 को 01 घंटे 43 मिनट IST तक रहेगा।


(() रेवती नक्षत्र मीन राशि में चंद्रमा के प्रवेश के साथ शुरू होगा। यह 16 सितंबर, 2019 को 01 घंटे 44 मिनट IST पर शुरू होगा। यह 17 सितंबर 2019 को 04 घंटे 22 मिनट IST तक चलेगा।

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 8.             29 सितंबर 2019 को बुध ग्रह तुला राशि में गोचर


29 सितंबर 2019 को भारतीय समय के अनुसार 13-13-30    , बुध चित्रा नक्षत्र में स्थित तुला राशि में गोचर करेगा। चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। जब बुध 7 वें सप्तम भाव से गोचर करेगा चंद्र अशुभ है शारीरिक, मानसिक चिंता, धन हानि, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ समस्याएं, यात्रा हानि, त्वचा रोग, कामुक सैक अपमानित हो सकते हैं, ग्राफ्टिंग से इंसान, बार-बार झगड़े, पत्नी या पति, बीमारियाँ। तुला राशि, तुला राशि और चित्रा नक्षत्रों को इस गोचर के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ेगा



                                     

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 सितम्बर, 20,2019 को 11 बजकर 01 मिनट  भारतीय स्टैंड समय के अनुसार में   शनि ग्रह पूर्वाषाढ़ नक्षत्र मे धनु.राशि

   स्थित मार्गी होगा। नक्षत्र के   स्वामी शुक्र ग्रह  हैं। धनु राशि में नवम शनि के नाम से जाना जाता है। यह इस घर में अशुभ फल देता है। ऐसे व्यक्ति जिनका धनु या धनु राशि में जन्म और शर्व नक्षत्र में जन्म इस गोचर अवधि के दौरान प्रभावी हो सकता है। शनि अपने पुरुषत्व स्वभाव का बहुत अधिक नुकसान करता है। यह एक सुसंस्कृत व्यवहार करता है, शांत, सभी धर्मी लोगों द्वारा सम्मानित किया जाता है, आगे बढ़ाता है और खतरों से मुक्त करता है। नौवें घर का संबंध धर्म से है, ईश्वर के प्रति समर्पण, दार्शनिक लोग धार्मिक कर्मकांड, भाग्य समृद्धि, शिक्षक, गुरु, पिता, अंतर्ज्ञान और विचार, पिछले धर्म के आचरण, लंबी यात्रा और विदेशी विश्वास करते हैं।

ट्रानिस्ट का प्रभाव: - पिता अचानक बीमारी है। स्कैंडल, घरेलू खुशी, यात्रा के दौरान परेशानियां, यात्रा खराब दृष्टि, यात्रा पर अनावश्यक खर्च। व्यक्ति एक व्यापक यात्रा कर रहा है, उसके माता-पिता से अलगाव हो सकता है। मूल निवासी दुःखी हो सकता है,


 29-सितंबर, 2019 को शरद नवरात्रि का प्रारम्भ   अक्टूबर, 7, 2019 (शुक्ल पक्ष) तक

29-9-2019                                    प्रथम प्रतिपदा                                     20-16
30-9-2019                                    द्वितीय द्वितीया                                    16-54
01-10-2019                                  तीसरी तृतीया                                      14-00
02-10-2019                                         4 चतुर्थी                                        11-45
03-10-2019                                  5 वीं पंचमी                                          10-16
04-10-2019                                  6 वीं षष्ठी                                              09-38
05-10-2019                                   7 वीं सप्तमी                                          09-53
06-10-2019                                  8 वीं अष्टमी                                            10-57
07-10-2019                                 9    वीं नवमी                                          12-40
















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