इस मास में अश्विन मास शुक्ल पक्ष कार्तिक / अक्टूबर 2025 से पंचक नक्षत्र में प्रारम्भ होने वाले हैं l
अक्टूबर महीने में पंचक नक्षत्र प्रारम्भ: - हमारे शास्त्रों में लिखा गया है कि पंचक नक्षत्र में कुछ विशेष ध्यान रखना चाहिए l सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित माना गया है l जैसे दक्षिक दिशा यात्रा करना निषेध होता हैं l नया भवन निर्माण नहीं करना चाहिए l लकड़ी से चारपाई, पलंग आदि नहीं बनवाना चाहिए l बांस और ईटीओ की दीवार का नहीं निर्माण करनी चाहिए l पीतल, तांबा, लोहे और लकड़ी वस्तुओं का संग्रह नहीं करनी चाहिए l विशेष मृत व्यक्ति का जलाना चाहिए l कोई विशेष परस्थितियों निर्माण हो जाता हैं तो किसी योग्य से सलाह कर पांच पुतले बनाकर कर विधि विशेष मृत व्यक्ति संस्कार करना चाहिए l
3 अक्टूबर 2025. 21:26 धनिष्ठा 4-10- 2025. 09:08
4-10-2025. 09:09 शतभिषा 5-10-2025. 08:00
5-10-2025 08:01 पूर्वाभाद्रपद. 6- 10-2025 06:15 6-10-2025 6:16 उत्तराभाद्रपदा 7-10-2025 04:00
7-10-2025 4:01 रेवती. 8-10- 2025 25:27
31-10-2025 06:47 मिनट पर पंचक नक्षत्र प्रारम्भ होगा l
मास में आश्विन मास शुक्ल पक्ष कार्तिक/अक्टूबर 2025 से गण्डमूल नक्षत्रों में नक्षत्र होने वाले हैं l
7-10-2025 4:02 रेवती 8- 10-2025 01:27
8-10-2025 01:28 अश्विनी 8- 10-2025 22:45 15-10-2025 12:00 आश्लेषा 16- 10- 2025 12:42 16-10- 2025 12:43 मघा 17-10-2025 13:58 25-10-2025 7:52 ज्येष्ठा 26- 10- 2025 10:45 26-10-2025 10:46 मूल 27- 10- 2025 13:28
गण्ड मूल कारक नक्षत्र: रेवती, आश्विन, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल ये सभी गण्ड मूल कारक नक्षत्र कहलाते हैं। इन नक्षत्रों के विशेष चरण में बालक/बालिका का स्वयं या स्वयं के लिए, परिवार में माता-पिता की आयु, स्वास्थ्य और सुख का सूचक होता है। यदि कोई बालक अपने पुण्य कर्मों के फलस्वरूप जीवित रहता है तो वह भूमि, सवारी, धन आदि से युक्त होता है। गण्ड मूल कारक नक्षत्र में उत्पन्न जीवों की शांति लगभग 27 दिन पश्चात उसी नक्षत्र में अवश्य कर लेनी चाहिए। यदि उस समय यह संभव न हो तो अगले जन्मदिन के निकट आने वाले नक्षत्र पूजा-पाठ की शांति अवश्य कर लेनी चाहिए। इस नक्षत्र में शुभ कार्य वर्जित हैं।
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