1. 9 सितंबर 2022 बुध वक्री गति कन्या राशि में गोचर करेंगे
9 सितंबर 2022 को भारतीय समय 7 बजकर 30 मिनट बुध कन्या राशि में वक्री होकर गोचर में रहेंगे।बुध कन्या राशि के स्वामी हैं।सायं में बुध पश्चिम क्षितिज में स्थित होंगे।सूर्य -शुक्र दोनों के ऊपर मंगल की दृष्टि होगी।कही पर भूस्खलन, भूकंप और प्राकृतिक प्रकोप ,बीमारी यो का प्रकोप जारी रहेगा।भचक्र में कन्या राशि क्रम छटा स्थान पर हैं।इस विस्तार 150 अंश से 180 अंश तक पड़ता है।इस राशि के अंतर्गत उत्तरा फाल्गुणी नक्षत्र के अन्तिम तीन चरण, हस्त नक्षत्र के सभी चार चरण तथा चित्रा नक्षत्र के पहले दो चरण से राशि पूर्ण होता है। सौर मंडल में कन्या राशि का स्वरूप नौका में बैठी युवती हैं।जिसके हाथों में अन्य और अग्नि हैं।यह दोनों चिन्ह सम्पन्नता और ज्ञान, प्रेम,तेजस्विता के प्रतीक हैं।कन्या राशि में15अंश उच्च और मीन राशि में नीच के होते है।
कन्या राशि किस स्थान पर निवास करती है, मिस्त्रीगिरी के स्थान, महिलाओं का मनोरंजन के स्थानों, चरागाह भूमि वो स्थान जिस पर पशुओं चराते हो और खेती बाड़ी करने योग्य भूमि होती है।दक्षिण दिशा, शुभ राशि, शिशोर्दय राशि, पेड़ पौधों वाली भूमि , मानसिक योग्यता, विधिवत पूजन करने वाला,तर्कशील,दोपहर के अंधा , छटा घर दु:स्थान, उपचय,शत्रुओं, शत्रुता, अवरोधों, मंगल, शनि,बुध का कारक ग्रह है।ऋण, रोग,सन्ताप,चोट, असफलताएं, बीमारियों , दुर्घटनाओं, षडयंत्र, मानसिक स्थिरता, पीड़ा,कारावास,क्रूर कार्य,काम क्रोध, मोह,लोभ, मोह,मातृपक्ष मामा, मौसी,पिता के सगे संबंधियों, पालतु जानवरों, भाई बन्धुओं, प्रतियोगित में अनुकूल परिणाम, लकड़ी,पत्थर, औजार ,जेल यात्रा,विदेशी यात्रा, अस्पताल, अहंकार,ईर्ष्या, देवेष, साझेदारी में खरीदारी, भौतिक सुखों, समृद्धि और अस्वस्थता ,खोजबीन, सौतली माता को इसी स्थान से देखा जाता हैं।शरीर में बड़ी आंत,गुर्दा,गुर्दे ,फेफड़ों को देखा जाता है।कन्या बुध ग्रह को प्रिन्स, बुद्धिजीवी, बुद्धिमता,शिक्षा, व्यापार और वाणिज्य, वाणी,प्रकाशन, लेखन, लेखा विद्या, वैज्ञानिक, काला जादू, वेद,वेदांत, पुराण,वाक्पटुता, बड़े भाई , मन्दिर, हाजिर जबाब,हस्त कला,लेखा जोखा, गणितज्ञ, गणित, डाकतार विभाग, यातायात व्यवस्था, चार्टर्ड अकाउंटेंट, सलाहकार, पत्रकारिता, सूचना प्रसारण, मीडिया, शिक्षाविद,दूर संचार माध्यमों, तांत्रिक क्रियाओं, कम्प्यूटरों की साफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, नकल उतारने वाला,लिपिक, पुरुष की नपुंसक,उत्तर दिशा, पन्ना, हरे रंग, हरे फलों, गन्ध,हरी सब्जियों, पित्त,वायु,बलगम, गुर्दा,गुदा, जांघे, त्वचा रोग,नाड़ी प्रणाली,मानसिक तनाव, रोग,ज्वर,खुजली ,चककर आना,गर्दन में दर्द,बोलने में रुकावट, हकलाना,नाक,गले के रोग,बवासीर, अपच, जिगर ,आंतो की समस्याओं ,धातु - मूल जीव,जनन कारक है।
16 सितंबर 2022 को सूर्य कन्या राशि में गोचर करेंगे।
16 सितंबर 2022 को भारतीय समय 7 बजकर 20 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में गोचर करेंगे। लग्न में सूर्य -बुध और वृषभ राशि मे उच्च चन्द एवं मंगल का योग और लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि बुधादित्य योग बना रही हैं।प्रधान नेतृत्व को यश प्राप्त करने सहायक होगी।शनि अपनी दशम दृष्टि से धन भाव को देखेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहेगी। राहु मेष राशि में स्थित है और राहु की सप्तम दृष्टि से धन भाव को देखेगे। मंगल की विशेष दृष्टि देश के कुछ हिस्सों में भयंकर रोग, अग्निकांड,भूखलन, भूकम्प आदि घटनाओं से हानि सम्भावना हैं। यह उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में है, इसका स्वामी सूर्य है। कन्या दोहरी राशि है। बुध स्वामी राशि है। इस राशि में मंगल-बुध-सूर्य है। ग्रहों की स्थिति, अप्रत्याशित भूकंप, भारी बारिश, शायद हुई, सांप्रदायिक दंगों में वृद्धि। अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। सूर्य जन्म के चन्द्रमा से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में गोचर करता है, यह शुभ फल देता है, यदि वेद स्थान क्रमशः ९वें, १२वें, ४वें और ५वें स्थान पर शनि के अलावा किसी अन्य ग्रह द्वारा गोचर नहीं किया जा रहा हो। वे एक महीने के लिए एक विशेष घर में रहते हैं। सूर्य की गति 1° प्रतिदिन, हमारे सौरमंडल में जितनी बड़ी है, उसका पारगमन महत्वपूर्ण है। यह शरीर को एक ऊर्जा प्रणाली के रूप में इंगित करता है। यह भावना, स्वास्थ्य और शक्ति पर प्रभाव डालता है। यह जातक के किसी भी लिंग के अधिकार पर प्रभाव डालता है। सूर्य व्यक्ति की आत्मा, शरीर, व्यक्तिगत आकर्षण, शक्ति, गंभीरता, शक्ति, आत्मनिर्भरता, साहस, मानसिक विकास, आंखों, मुंह, सिर, हड्डियों, रक्त और मानसिक बीमारी, अधिकार, आत्म- पर प्रभाव का कारक है। अभिव्यक्ति, सरकार, नेता, बड़ों का सम्मान, पुत्र, पिता,
जन्म के चंद्रमा से छठे भाव से गुजरने वाला सूर्य शुभ फल देता है जैसे शत्रुओं पर सफलता, किसी उपक्रम में सफलता, सुख-सुविधाओं तक पहुंच, बीमारी का इलाज, अच्छे अधिकारियों से लाभ, पद में वृद्धि, पदोन्नति और मानसिक शांति, मंगल भी पारगमन। छठे भाव में सूर्य होने से तेज बुखार और ऊंचाई से चोट लगने का खतरा रहता है। भौतिक समृद्धि, छठा घर शत्रु, रोग, दुख, दुख, बीमारी, घोटालों, मानसिक कष्ट, मुकदमेबाजी, मामा, नौकर, पालतू जानवर, माता का भाई, पैतृक संबंध, शरीर का अंग गुर्दा, दाहिना फेफड़ा, दाहिना बछड़ा, बड़ी आंत का प्रतिनिधित्व करता है।
24 सितंबर 2022 को शुक्र कन्या राशि में गोचर करेंगे
24 सितंबर 2022 को शुक्र उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित होकर कन्या राशि में गोचर करेंगे और यह उनकी नीच राशि है। सूर्य और बुध की युति होगी। जब कोई ग्रह सूर्य के पास स्थित हो और कमजोर होकर दहन की ओर बढ़ रहा हो। वैसे भी शुक्र सूर्य के नक्षत्र में स्थित है।