गण्डमूल नक्षत्र
3 अक्टूबर 2019 को 12 घंटे बजकर 15 मिनट पर ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रारम्भ होगा।
4 अक्टूबर 2019 भारतीय स्टैंड समय 12 बजकर 23 मिनट तक वृश्चिक राशि मे रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र सबसे बड़ा नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस नक्षत्र की गणना दिव्य शक्ति के रूप में कई जाती हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक ,पिछले कर्मो के शुभ प्रभाव से धन -वैभव व सफलता पाता हैं। वैसे राक्षस गण की उपमा दी जाती हैं। यदि यह नक्षत्र पाप से पीड़ित हो तो जातक अभिमान वंश धर्म विरुद्ध आचरण कर बैठते है। शुभ प्रभाव होतो जातक देवीय कृपा से पद ,प्रतिष्ठा, धन और यश प्राप्त करता हैं।ज्येष्ठानक्षत्र वायु प्रधान नक्षत्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र जातक यदि वायु सम्बन्धित रोग, पेट गैस तथा गठिया सरीखे रोगों से कष्ट पाते हैं।
1. ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रथम चरण में उत्पन्न जीव बड़े भाई को अरिष्टकर होता हैं।
2 दूसरे चरण में उत्पन्न बालक /बालिका छोटे भाई के लिए अरिष्टकारी होता हैं।
3.ज्येष्ठा नक्षत्र तीसरे चरण में उत्पन्न माता के अरिष्टकर होता हैं तथा
4. ज्येष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण उत्पन्न बालक स्वयं के लिए शुभ नही होता हैं।
2. मूल नक्षत्र भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 4 अक्टूबर 2019 को 12 बजकर 24 मिनट पर धनु राशि मे प्रवेश करेंगे।
5अक्टूबर 2019 को 13 बजकर 22 मिनट तक धनु राशि मे गोचर करेगे।मूल नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र कहलाता है। भचक्र के तीसरे तिहाई भाग का प्रथम नक्षत्र हैं।मूल नक्षत्र को महत्व प्रदान करने के लिए ही सभी तिहाई भाग के प्रथम व नवम नक्षत्र मूल संज्ञक माना जाता हैं। इस नक्षत्र का तापमान 30 हजार सेलशियस आंका गया हैं।इस नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं। मूल का अर्थ है पौधे की जड़ ,यानि केन्द्र बिंदु हैं।यह नक्षत्र अपने नाम द्वारा जाना जाता हैं। जड़ सैदव भीतर रहती हैं,अपनी गुप्त मनोभाव ,अव्यक्त इच्छाओ , गुप्त रहस्यपूर्ण है मूल नक्षत्र हैं।
मूल नक्षत्र को स्वयं बृहस्पति जी ने आशीर्वाद दिया है।क्योंकि गुरु की मूलत्रिकोण राशि धनु ,जो काल पुरूष का भाग्य स्थान हैं उसी शुभ राशि मे मूल नक्षत्र विद्यमान हैं। मूल नक्षत्र भारी उथल पुथल के बाद सत्य,समानता ,न्याय व अहिंसा की जड़ो को जमाता हैं। मूल नक्षत्र में वशिष्ट गुण किसी भी बात तह तक पहुँचना ,समस्या का समाधान करने की शक्ति रखता हैं। कुछविद्वानों का मत हैं कि मूल नक्षत्र एक पुरूष नक्षत्र हैं,भगवानविष्णु जी के दोनों चरण के रूप में स्वीकृति दी है। मूल नक्षत्र वाले जातक घमंडी ,सबसे श्रेष्ठ मानने वाला, हठी,साहसी कार्य करने वाला होता हैं। अपने स्वामी केतु का असर भी दिखाई देता हैं।जातक बहुधा हिंसा, तोड़ फोड़ में भी रुचि रखता हैं।
I.मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाला जातक अपने पिता के आरिष्टकार होता हैं।
2. मूल नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक अपनी माता के लिए अच्छा नही होता हैं।
3. तीसरे चरण में जन्म लेने वाला। जातक स्वयं के अच्छा नही होता हैं।
4.मूल नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक अनिष्ट प्रद माना जाता हैं। मूल नक्षत्र की शांति व पूजन करवाने से सुख व समृद्धि प्राप्त करता हैं।
1 पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे पिता के लिए अशुभ होते हैं।
द्वितीय पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माता के लिए अशुभ होते हैं।
तृतीय पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चों को आर्थिक हानि का सामना करना पड़ेगा।
चौथा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे परिवार और रिश्तेदारों के लिए शुभ होते हैं।
अश्विनी नक्षत्र :- 14 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार चन्द्रमा अश्विनी नक्षत्र में स्थित मेष राशि मे प्रवेश करेगा। 15 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक मेष राशि मे गोचर करेगा।
पहला चरण पिता के लिए अशुभ होता है। 2 और 3 चरण आम तौर पर अच्छे होते हैं। लेकिन चौथा चारण मूलनिवासी के लिए अशुभ है।
अश्लेषा नक्षत्र 22 अक्टूबर 2019 को सायं काल 16 बजकर 39 मिनट पर चन्द्रमा अश्लेषा नक्षत्र में स्थित कर्क राशि मे प्रवेश करेंगे। 23 अक्टूबर 2019 पर 15 बजकर 13 मिनट कर्क राशि मे गोचर करेगे।
आश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण: बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार होगा और वह प्रतिभाशाली होगा।
दूसरा पाडा: ऐसे लोग लालच और धोखाधड़ी के घोटालों में पारंगत होते हैं। कई विद्वानों की राय में, ऐसे लोग धन का नाश करते हैं।
तीसरा पाद: ऐसा व्यक्ति अपनी मां के लिए अशुभ होता है।
4 वा पाद: ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारी होता है।
23 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय पर चन्द्रमा माघ नक्षत्र में स्थित सिंह राशि मे प्रवेश करेगा।24 अक्टूबर 2019 को 13 बजकर 18 मिनट तक सिंह राशि मे गोचर करेगे।
1 पाद: इसमें जन्म लेने वाला बच्चा 5 महीने तक पिता के लिए अशुभ रहेगा।
द्वितीय पाद से चतुर्थ पाद: इन पादों में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र :- 30 अक्टूबर 2019 को चन्द्र ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित भारतीय स्टैंड समय 21 बजकर 59 मिनट पर वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेगा।31 अक्टूबर 2019 रात 21 बजकर 36 मिनट तक वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे।
प्रथम पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे मातृपिता के लिए अशुभ होते हैं।
दूसरा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे मातृ दादी के लिए अशुभ होते हैं।
तीसरा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माता-पिता के लिए अशुभ होते हैं और माता के सह-जन्म होते हैं।
चौथा पाड़ा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे सह जन्म के लिए अशुभ होते हैं।
5 वा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे अपने लिए अशुभ होते हैं।
6 वा पाडा: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
7 इस राशि में जन्म लेने वाले बच्चे अपने जीवनसाथी के लिए अशुभ होते हैं।
8 वा पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे अपने लिए अशुभ होते हैं।
9 वाँ पाद: - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे पिता के लिए अशुभ होते हैं।
10 वा पाद : - इस पाद में जन्म लेने वाले बच्चे माँ के लिए अशुभ होते हैं
4 अक्टूबर 2019 को शुक्र ग्रह तुला राशि गोचर करेगे।
अक्टूबर, 2019 शुक्र ग्रह 3 घंटे 50 मिनट में 50 सेकंड में तुला राशि में गोचर करेगा। वर्तमान में शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। मंगल चित्रा नक्षत्र का स्वामी है। इस गोचर की अवधि में तुला और आरोही वाले ये लोग प्रभावित होंगे। जिन लोगों का जन्म नक्षत्र चित्रा भी प्रभावित होगा। शुक्र तुला राशि का स्वामी है और साथ ही सातवें घर का आरोही। 7 वां घर विवाह, साझेदारी, पत्नी, पति शत्रु, सौतेले बच्चे, बॉस, दूसरा बच्चा, पैतृक भव्य पिता, भाइयों का पुत्र का है। वेन्यू शादी, सेक्स इच्छा, चांदी, आराम, अच्छे कपड़े, सौंदर्य, नृत्य, संगीत, सपने, सामग्री भव्य माता-पिता, पानी, प्रतिभा शराब, संबंध, मुकदमेबाजी, सेक्स जुनून या संघ, कूटनीति, चोर का वर्णन और सामाजिक बातचीत का प्रतिनिधित्व करता है।गोचर प्रभाव: - जब शुक्र 1, 2, 3, 4, 5 वें, 5 वें, 8 वें, 9 वें, 11 वें और 12 वें भाव में चंद्रमा से अच्छे परिणाम देता है, लेकिन 8 वें, 7 वें, 1, 10 वें, 9 वें में कोई ग्रह नहीं होना चाहिए , 5 वाँ, 11 वाँ, 6 वाँ, 3 वाँ मकान पत्राचार के होते हैं। इस बार, शुक्र 28 अक्टूबर, 2019 तक केवल 24 दिनों में पारगमन करेगा।
7 वें घर में परिणाम: -
शुक्र घरेलू स्तर पर दुःख देगा, घोटालों में शामिल होना, स्वास्थ्य के मामले, क्रोध, अतिरिक्त-वैवाहिक संबंध, धन की हानि, पत्नी के साथ समस्याएं, व्यापार साझेदार जहाज में संघर्ष, लेकिन दुष्ट महिलाओं के कारण कठिनाइयों के साथ जुड़ा हुआ है।
स्वास्थ्य प्रभाव: - पित्ताशय, मूत्र संबंधी समस्याओं, गर्भाशय, मूत्र अंगों के संचालन में वृद्धि होगी।
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पंचक नक्षत्र
भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 9 अक्टूबर 2019 को 09 बजकर 41 मिनट पर चन्द्रमा कुम्भ राशि मे धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
9 अक्टूबर 2019 रात 23 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।उस समय पंचक नक्षत्र का प्रारम्भ होगा। धनिष्ठा नक्षत्र की तुलना भगवान शिव के डमरू के रूप में करते हैं।प्रभु की इच्छा ही जातक की इच्छा बनती है।अहंकार व अभिमान उसमे बाधा नही देते हैं। इस नक्षत्र की ऊर्जा प्राप्त कर जातक कठिन कार्य व श्रमसाध्य कार्य को सहज ढंग से निपटा लेता हैं। वाद्य यन्त्र बजाना सुखद अनुभव है। आठ वसुओं को धनिष्ठानक्षत्र का अधिष्ठाता देवता मानते हैं।जल, ध्रुव, सोम, धर, अनिल ,अनल,प्रत्यूष और प्रभास हैं। पीठ व गुदा को धनिष्ठा नक्षत्र का अंग मानाजाता हैं। मेरुदण्ड का सम्बंध शनि व मकर राशि से जोड़ा जाता हैं।कुंडलिनी मूलाधार चक्र से सहस्रार मस्तिष्क के ऊपरी भाग पहुँचती हैं।भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 9 अक्टूबर 2019 को 23 बजकर 13 मिनट पर चन्द्रमा कुम्भ राशि मे शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
11 अक्टूबर 2019 सुबह 2 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।यह दूसरा पंचक नक्षत्र का प्रारम्भ होगा। शतभिषा नक्षत्र का अर्थ है सौ चिकित्सक, सौ औषधियां सौ उपचार-कर्ता जीवन मे जो रोग दुःख कष्ट, या पीड़ा है,उसको मिटाने के लिए दैवीय व्यवस्था में औषधि व उपकरण से सुसज्जितहैं ।वृत आकार वाला चक्र कहते है।रहस्य व गोपनीयता,सीमा व सुरक्षाको छिपा हुआ है । इस नक्षत्र में सभी समस्याओं सुलझाने के शक्ति होती है। सौ वैद्य ही इस नक्षत्र के स्वामी हैं। सभी प्रकार के दोष, दुर्बलता व रोगों का शमन करते हैं। इस नक्षत्र वाले जातक सबसे अलग रहना पसंद करते हैं।वायु तत्व प्रधान होने से ,जातक चिनन्त,मनन व विश्लेषण करने कुशल होता हैं। नक्षत्र के स्वामी राहु हैं।
11 अक्टूबर 2019 भारतीय स्टैंड समय पर 02 घण्टे 14 मिनट चँद्रमा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र स्थित कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे।
12 अक्टूबर 2019 सुबह 05 बजकर 09 मिनट तक कुम्भ /मीन राशि में गोचर करेगे।पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का अर्थ होगा पहला भाग्यशाली पावों वाला नक्षत्र । शुभ नक्षत्र हैं। कालपुरुष एकादश भाव कुम्भ राशि लौकिक कार्यो से क्लान्त मन, हानि-लाभ का लेखाजोखा करने केबाद विश्राम पाने के शैया पर जाना चाहता हैं।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के दो चेहरे वाला व्यक्ति से दर्शाया जाता है। इसका एक चेहरा बहुत सौम्य,विनम्र, दयालु व परोपकारी व्यक्ति का है दूसरा चेहरा कठोर, निर्मम, क्रूर ,हिसा प्रिय तथा आतंकी होता हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक दिन में सामान्य और दूसरे क्षण विपरीतप्रभाव में दिखाई पड़ता हैं। ब्राह्मण वर्ण नक्षत्र,पुरूष सज्ञक नक्षत्र होता हैं।वायु दोष वाला नक्षत्र हैं। तीन पद कुम्भ, आखिर पद मीन राशि मे पड़ता हैं। मृतक संस्कार, कफ़न बनाने वाले व बेचने होते हैं।दाह संस्कार करने वाले पंडित, शल्य चिकित्सक होते है।आतंकवादी, मनोविश्लेषक तथा कालाजादू करने वाले होते है। मनुष्य गण के व्यक्ति होते हैं। विवाह, यात्रा, संभोग या सरकारी अधिकारियों से मिलने के लिए पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र वर्जित हैं।
13 अक्टूबर 2019 सुबह 07 बजकर 53 मिनट तक मीन राशि में गोचर करेगे।उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का अर्थ होगा शुभ पावों वाला बाद नक्षत्र । शुभ नक्षत्र हैं। कालपुरुष द्वादश भाव मीन राशि निद्रा सुख के लिए शैया पर जाना चाहता हैं। मोक्ष से माना जाता हैं। मीन राशि को प्रायः सभी ने मोक्ष देने वाली राशि माना जाता हैं।द्वादश भाव तो निद्रा व शयन सुख का भाव है।उत्तरभाद्रपद को शयन शैया के पिछले पैर मानना ही उचित हैं। सोया व्यक्ति शव सरीखा देखने -सुनने में अक्षम व निश्चेष्ट होता हैं। इस नक्षत्र की तुलना मेरुदण्ड के मूल स्थान गुदा के समीप सुप्त कुंडलिनी से करते हैं। मीन राशि के ह्रदय में स्थित शनि का नक्षत्र उत्तरभाद्रपद तो कुंडलिनी शक्ति जाग्रत कर ज्ञान व वैराग्य प्राप्ति की बात कहता हैं।
12 अक्टूबर 2019 भारतीय स्टैंड समय पर 05 घण्टे 10 मिनट चँद्रमा उत्तरभाद्रपद नक्षत्र स्थित मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
13 अक्टूबर 2019 सुबह 07 बजकर 53 मिनट तक मीन राशि में गोचर करेगे।उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का अर्थ होगा शुभ पावों वाला बाद नक्षत्र । शुभ नक्षत्र हैं। कालपुरुष द्वादश भाव मीन राशि निद्रा सुख के लिए शैया पर जाना चाहता हैं। मोक्ष से माना जाता हैं। मीन राशि को प्रायः सभी ने मोक्ष देने वाली राशि माना जाता हैं।द्वादश भाव तो निद्रा व शयन सुख का भाव है।उत्तरभाद्रपद को शयन शैया के पिछले पैर मानना ही उचित हैं। सोया व्यक्ति शव सरीखा देखने -सुनने में अक्षम व निश्चेष्ट होता हैं। इस नक्षत्र की तुलना मेरुदण्ड के मूल स्थान गुदा के समीप सुप्त कुंडलिनी से करते हैं। मीन राशि के ह्रदय में स्थित शनि का नक्षत्र उत्तरभाद्रपद तो कुंडलिनी शक्ति जाग्रत कर ज्ञान व वैराग्य प्राप्ति की बात कहता हैं।
उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के जातक एक श्रेष्ठ सलाहकार बनता हैं।यह नक्षत्र जल तत्व प्रधान मीन राशि मे होने से आग बुझाने के लिए सक्षम होता हैं। यह जातक विज्ञान,प्रौद्योगिकी,ज्योतिष, अंकशास्त्र,योग,ध्यान व आध्यात्म विज्ञान में सफलता प्राप्त करता हैं। कुछ कार्य हैं:-जैसे कि विवाह, घर व कार्यलय का के निर्माण कार्य, वित्तिय लेन देन का कार्य, संभोगसुख, गृहप्रवेश,नामकरणसंस्कार सभी कार्य शुभ माने जाते हैं। वर्जित कार्य :- यात्रा करना, मुकदमादायर करना, शुत्र पर आक्रमण करना, जुआ व सट्टा लगना, धन उधार देने वर्जित हैं।
रेवती नक्षत्र :- 12 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय 7 घण्टे 53 मिंट पर चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में स्थित मीन राशि मे प्रवेश करेगा। 13 अक्टूबर 2019 को 10बजकर 18 मिनट तक मीन राशि मे गोचर करेगे। रेवती का अर्थ है। धन धान्य से परिपूर्ण राशि भचक्र अन्तिम राशि अंतिम नक्षत्र हैं। भगवान से प्राप्त योग, सत्य, सौभाग्य तथा आठों लक्ष्मी का समावेश हैं। रेवतीनक्षत्र का सम्बंध आत्मज्ञान व मोक्ष से भी हैं। रेवती नक्षत्र की आकृति मृद्गन बनाते है।18 अक्टूबर 2019 को सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे।
सूर्य ग्रह भारतीय समय के अनुसार 03 बजकर 37 मिनट 40 सेकण्ड पर तुला राशि में गोचर करेंगे | इस समय सूर्य चित्रा नक्षत्र में स्थित हैं | चित्रा नक्षत्र स्वामी मंगल ग्रह है | सूर्य के गोचर प्रभाव तुला लग्न और राशि और चित्रा नक्षत्र वाले व्यक्तियों पर होगा | सूर्य का यह गोचर एक महीने का होता है | तुला राशि में सूर्य नीच अवस्था में होते हैं | जिस समय सूर्य गोचर करते हैं , जन्म चन्द्रमा से 3 , 6 ,10 और 11 वे घरो में अच्छा प्रभाव देते है यदि 9 वे , 12 वे 4 और 5 वे घरों में शनि के इलावा कोई ग्रह न स्थित हो | सूर्य का यह गोचर बहुत महत्वपूर्ण होता है | हमारे शरीर में ऊर्जा के स्रोत्र है | यह हमारी भावनाओ , स्वास्थ्य ,और शक्ति प्रदान करते है |
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29-9-2019 प्रथम प्रतिपदा 20-16
30-9-2019 द्वितीय द्वितीया 16-54
01-10-2019 तीसरी तृतीया 14-00
02-10-2019 4 चतुर्थी 11-45
03-10-2019 5 वीं पंचमी 10-16
04-10-2019 6 वीं षष्ठी 09-38
05-10-2019 7 वीं सप्तमी 09-53
06-10-2019 8 वीं अष्टमी 10-57
07-10-2019 9 वीं नवमी 12-40
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अक्टूबर, 7, 2019 (शुक्ल पक्ष) तक 29-सितंबर, 2019 को नवरात्रि का आयोजन
नवरात्रि तिथि तिथि तक29-9-2019 प्रथम प्रतिपदा 20-16
30-9-2019 द्वितीय द्वितीया 16-54
01-10-2019 तीसरी तृतीया 14-00
02-10-2019 4 चतुर्थी 11-45
03-10-2019 5 वीं पंचमी 10-16
04-10-2019 6 वीं षष्ठी 09-38
05-10-2019 7 वीं सप्तमी 09-53
06-10-2019 8 वीं अष्टमी 10-57
07-10-2019 9 वीं नवमी 12-40
24 अक्टूबर 2019 को बुध ग्रह वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे
24 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 03 बजकर 40 मिनट पर बुध ग्रह वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेंगे। इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। बुध ग्रह विशाखा नक्षत्र में स्थित हैं। विशाखा नक्षत्र के स्वामी भी मंगल ग्रह है। वृश्चिक राशि एक जल, शीर्षोदय ,स्थिर राशि है। उत्तर दिशा का प्रतिनिधि करती है। बुध ग्रह यहाँ पर अपना अच्छा प्रभाव नही देते हैं। बुध हमारे, ज्ञान, शिक्षा, मित्रों, व्यवसाय और व्यपारी, गणित,साइंटफिक सीखने,भाषण, मामा व मामियों , काला जादू, वेद,पुराण, बड़े चचेरे भाई का प्रितिनिधित्व करता हैं।
वृश्चिक राशि एवं विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर प्रभाव जिन व्यक्तियों का जन्म वृश्चिक राशि एव विशाखा नक्षत्र में हुआ है। उन पर बुध ग्रह प्रभाव होगा।जिस समय बुध ग्रह किसी राशि मे गोचर करते हैं जन्म राशि यानि चन्द्रमा जहाँ स्थित हो । उससे 2, 4, 6, 8, 10, और 11 भावों में गोचर का शुभ प्रभाव देता है यदि 5,3,9,1,8 और 12 भावों में चन्द्र के अलावा गोचर का अन्य ग्रह न हो। गोचर में बुध हमारी मानसिक एकाग्रता एवं प्राथमिकताओ में परिवर्तन को भी दर्शाता हैं। यदि बुध जन्मकुंडली या गोचर में पाप प्रभाव में न हो। विचारों में स्पष्टता देता हैं।यदि बुध वक्र गति में घटनाओं आशा के विरुद्ध पलट जाती है। यह प्रभाव तभी दिखलाई देते हैं यदि बुध दशा एव अन्तर दशा चल रही हो।
आठवें भाव गोचर का प्रभाव :- आठवें भाव में बुध का गोचर शुभ होता हैं। घर मे शिशु का जन्म, धन के स्त्रोतो में वृद्धि, उच्च अधिकारियों से अनुकूलता, शत्रुओं पर विजय, सट्टे से लाभ, नए घर की प्राप्ति, आर्थिकविकास होता है। knowtransit.blogspot.com
28 अक्टूबर 2019 को शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।
28 अक्टूबर 2019 को भारतीय स्टैंड समय अनुसार 09 बजकर 06 मिनट पर शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेंगे। इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। शुक्र ग्रह विशाखा नक्षत्र में स्थित हैं। विशाखा नक्षत्र के स्वामी भी मंगल ग्रह है। वृश्चिक राशि एक जल, शीर्षोदय ,स्थिर राशि है। दक्षिण-पूर्व दिशा का प्रतिनिधि करती है। शुक्र ग्रह यहाँ अच्छा प्रभाव नही देते हैं। शुक्र ग्रह हमारी शादी, पत्नी, खुशियों ,सुख साधन, विलासिता, यौन इच्छा,सुंदरता, नाना-नानी, कर्मा, योग्यता, शराब, अच्छे वस्त्र, सास-सुसर ,सुगधित पदार्थों का प्रतिनिधितव करता हैं।
वृश्चिक राशि एवं विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर प्रभाव जिन व्यक्तियों का जन्म वृश्चिक राशि एव विशाखा नक्षत्र में हुआ है। उन पर शुक्र ग्रह प्रभाव होगा।जिस समय शुक्र ग्रह किसी राशि मे गोचर करते हैं जन्म राशि यानि चन्द्रमा जहाँ स्थित हो । उससे 1,2,3, 4, 5, 8, 9,11 और 12 भावों में शुक्र ग्रह गोचर का शुभ प्रभाव देता है यदि 8,7,1, 10,5,11,6, 3 भावों में चन्द्र के अलावा गोचर का अन्य ग्रह न हो। गोचर में शुक्र हमारी प्रेम ,मनोभावों, धार्मिकभावनाओं एवं शक्तियों बल प्रदान करता हैं। । यदि शुक्र जन्मकुंडली या गोचर में पाप प्रभाव में न हो। धार्मिक स्पष्टता देता हैं।यदि शुक्र खुशियां,सामाजिक प्रोग्राम, मनोरंजन करने के लिए सक्षम बनाता है।यह शुक्र ग्रह नए सम्बन्ध ,आर्थिकविकास, वाहन, ऊँचाई देता है। यदि शुक्र दशा एव अन्तर दशा चल रही हो।
आठवें भाव शुक्र ग्रह के गोचर का प्रभाव :- आठवें भाव में शुक्र का गोचर शुभ होता हैं। जीवनसाथी के द्वारा धन की वृद्धि होती हैं।, प्रेमके सम्बंध बनता हैं।, जिन व्यक्तियों की शादी की आयु हो गई उनकी शादी भी करवा देता हैं।नए भूमि अधिग्रहण करता हैं।मित्रो से सहयोग करता हैं।, सुख साधनों में वृद्धि होती है। स्वास्थ्य लाभ और बीमारियों से लड़ने की सक्षमता प्राप्त करने शक्ति देता हैं।
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