Sunday, September 15, 2019

नवम्बर 2019 की ज्योतिषीय रूप महत्वपूर्ण घटनाएं


        गण्डमूल नक्षत्र 


      
  1.      मूल नक्षत्र :-  1 नवंबर 2019 को  भारतीय स्टैंड समय अनुसार 21 बजकर 51 मिनट तक मूल नक्षत्र धनु राशि मे गोचर करेगे। मूल नक्षत्र क्रांतिवृत से 13 डिग्री 47 अंश 16 " दक्षिण तथा विषुवत रेखा से 37° 6' 7" दक्षिण में स्थित हैं। मूल शब्द का अर्थ पेड़ का जड़ है यानि धरती में रहस्य होता हैं। इसी तरह इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के मनोभाव , अव्यक्त इच्छाओं, अनजान क्षेत्र व अज्ञात घटनाओं के साथ माना जाता है। केतु इस नक्षत्र के स्वामी हैं। यह नक्षत्र सभी संचित कर्मो का फल देने की क्षमता रखता हैं। वही प्रारब्ध बनकर इस जन्म में जातक के सम्मुख प्रगट होता हैं। पिछले जन्मों का ज्ञान व अनुभव केतु के पास सुरक्षित हैं।

         प्रथम चरण :- मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाला जातक अपने पिता का नाश करता है।  

 दूसरे चरण :- मूल नक्षत्र दूसरे चरण में जन्म लेने व्यक्ति अपनी माता का अरिष्ट करता है।   

 मूल नक्षत्र तृतीय पद में जन्म लेने वाला जातक अपने धन का नाश करता हैं। 

 चतुर्थ पद में जन्म लेने वाला जातक की कुछ विशेष अच्छा होता हैं।     

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  5  नवम्बर 2019 को  बृहस्पति का धनु राशि में गोचर


               






5   नवम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय 02 बजकर 50 मिनट बृहस्पति अपनी धनु राशि मे प्रवेश में करेगे। उस समय बृहस्पति मूल नक्षत्र में स्थित हैं। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं। राशि स्वामी अपने घर आ जाएगे। यहाँ पर बृहस्पति एक वर्ष रहेंगे। बृहस्पति का गोचर जन्मचन्द्रमा से दूसरे ,पंचम ,सप्तम,नवम,और ग्याहरवें स्थान शुभ फल देते हैं।परन्तु बारहवे ,चौथे, तीसरे,दशम और आठवे स्थान में कोई ग्रह नही होना चाहिए। स्वात्तिक, धर्म, आध्यात्मिकता, आंतरिक ज्ञान,न्याय और दया की भावना कारक  ग्रह है। शिक्षा, दार्शनिक, ज्योतिष, धन को देने वाला, पुत्र, पति, दादा,दादी,राजसी, सम्मानित करने वाला ग्रह हैं। शनि और केतु वहाँ पहले ही स्थित हैं।उच्च अंतर्ज्ञान शक्ति, विदेश में शिक्षा देने वाला होता है।दान करने वाला तथा खुली विचारदार वाला होता हैं।  व्यक्ति को ऊँचाई को ओर ले जाने वाला होता हैं।
      बृहस्पति के गोचर का प्रभाव :-  धनु राशि,धनु लग्न एवं मूल नक्षत्र में पैदा हो ने जातकों पर ही होगा ।बृहस्पति का यह गोचर व्यक्ति शुभ फल, जीवन में उन्नति, सम्मान, धन की वृद्धि, जिनके पुत्र नही है उनको बृहस्पति के आशीर्वाद से पुत्र पैदा होगा। जिन बच्चों की आयु शादी के लायक हो गए ,उनकी शादी होगी। जो व्यक्ति विदेश जाना चाहते हैं वो विदेश में जाकर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
यह सब कुछ तभी सम्भव होगा आपका बृहस्पति कुंडली मे अच्छा होगा। अच्छा व बुरा प्रभाव उसी समय मिलेगा।जिस व्यक्ति की दशा और अन्तर दशा चल रही होगी।
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 5 नवम्बर  से 10 नवम्बर 2019 पंचक नक्षत्र


3.     9 नवम्बर  से 11नवम्बर 2019 गण्डमूल नक्षत्र

    4.            10 नवंबर 2019 को मंगल ग्रह तुला राशि में गोचर

   10 नवम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय 14 बजकर 20 मिनट मंगल ग्रह तुला राशि  मे प्रवेश में करेगे। उस समय मंगल ग्रह चित्रा नक्षत्र में स्थित हैं। चित्रा  नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं। तुला राशि स्वामी  के स्वामी शुक्र ग्रह हैं । यहाँ पर मंगल ग्रह 45 दिनों तक  रहेंगे।तुला राशि का अर्थ काल पुरूष कुंडली का सप्तम भाव मंगल  का गोचर जन्मचन्द्रमा से तृतीय ,छठे  और ग्याहरवें स्थान शुभ फल देते हैं।परन्तु बारहवे ,पंचम,  और नवम  स्थान में कोई ग्रह नही होना चाहिए। मंगल एक ऊर्जावान ग्रह हैं। मंगल जातक के बड़े भाइयों , चचरे भाईयो, स्थाई संम्पति, खून,शल्य चिकित्सा  ,विज्ञान,तर्क, आग, भूमि ,गणित,सौतेली माँ, जहर, गुस्सा, घृणा, अचानक मृत्यु,जलन, ज्वर,उच्चरक्तचाप, संक्रमण, दुर्घटना,बहादुरी ,मासपेशियों, ताकत, कारक है। इनका प्रतिनिधित्व करता है।
       मंगल ग्रह के तुला राशि/ लग्न में गोचर का प्रभाव  :-  मंगल ग्रह का तुला लग्न/राशि तथा चित्रा नक्षत्र में स्थित मंगल का प्रभाव क्या होगा।। जिन व्यक्तियों का जन्म तुलालग्न/राशि तथा चित्रा नक्षत्र वाले पर ही होगा। सप्तम भाव मंगल का स्थित होना जातक को मांगलिक  होता हैं।  यह जातक दूसरे की सहायता व विचारों की मदद लेकर कार्य करता है। इस गोचर में पति / पत्नी को बीमारी होना, विवाहितजीवन मे खुश न होना। पार्टनर से मतभेद, आँखों का रोग, पेट दर्द और उच्च रक्तचाप, हो सकते हैं। आय में कमी, शुत्रओ से कष्ट, मानसिक परेशानी,  शराब की लत लग जाने का भय रहता है। यह सभी घटनाएँ तभी होगी जिस समय जातक की मंगलग्रह दशा व अन्तर दशा कुंडली मे चल रही हो।
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       3.   17 नवंबर 2019 को सूर्य वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।

          
 17 नवम्बर 2019 को सूर्य भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 03 बजकर 35 मिनट 30 सेकण्ड्स पर वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे।सूर्य इस समय विशाखा नक्षत्र में स्थित हैं। सूर्य एक राशि मे एक महीने तक गोचर करते हैं। सूर्य हमारे स्वास्थ्य, पिता, शक्ति, सत्ता,सरकार, बल,नाम एवं प्रसिद्धि, नेत्र, दवाओं,ऊन, लकडी, चाचा,  कमीशन , खून, प्रशासन अधिकारी, साहूकार, राजनेता, आत्मा, शानशौकत, साहस,कड़वाहट,दुष्टता का प्रतिनिधित्व करता हैं।सूर्य का गोचर जन्म चन्द्रमा से तीसरे, छठे,दशम और ग्यारहवां स्थान पर शुभ परिणाम देता है उस समय शनि के अलावा किसी भी अन्य ग्रह का समानांतर वेध स्थानों नवम, बारहवें,चोथे और पंचम  स्थान में कोई ग्रह न हो।तो इसका परिणाम शुभ होता हैं।विशाखा नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं और राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। दोनों ही सूर्य के मित्र ग्रह है। अष्टम भाव आयु, दुर्घटना, मृत्यु, अचानक मुसीबत, धन हानि, देरी ,शोक,मानसिक परेशानी होती हैं।

             अष्टम भाव सूर्य के गोचर का प्रभाव क्या होता है।       वृश्चिक राशि व लग्न तथा विशाखा नक्षत्र वाले जातकों पर क्या प्रभाव होगा। जिस समय सूर्य चन्द्र से आठवें भाव गोचर करता है। तो जातक को पत्नी,पुत्र,या किसी सम्बन्धी की हानि हो सकती हैं।दुश्मनों से झगड़ा,शरीरिक पीड़ा, बवासीर,नेत्र रोग,  उच्च रक्तचाप, पड़ोसियों से रिश्ते खराब हो सकते हैं।बच्चों, पिता से परेशानी तथा यात्रा में कष्ट ,धन का अव्यय ,क्रोध में वृद्धि आदि समय आ सकती है।यह सब तभी सम्भव होगा यदि कुंडली मे सूर्य दशा व अन्तर दशा चल रही हो।

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   18नवम्बर  से 20नवम्बर 2019 गण्डमूल नक्षत्र

  4.                         21 नवंबर 2019 को शुक्र ग्रह धनु राशि में गोचर करेगे।

          21 नवम्बर 2019 को शुक्र ग्रह भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 14 बजकर 10 मिनट 50 सेकण्ड्स पर धनु राशि मे गोचर करेगे।शुक्र इस समय मूल नक्षत्र में स्थित हैं। शुक्र एक राशि मे लगभग एक महीने तक गोचर करते हैं। शुक्र हमारे आकर्षण, प्रेम और बिना किसी स्वार्थ के लोगों से जोड़ने वाली भावनाओं का स्वामी ग्रह हैं। यह उच्च आध्यात्मिकता की भी रचना करता हैं। यह सामाजिक ग्रह है जो खुशी, सामाजिक समारोहों, सभाओं एवं मनोरंजन तथा आनन्द का कारक ग्रह ह।शुक्र ग्रह का गोचर जन्म चन्द्रमा से दूसरे,तीसरे, चौथे,पंचम,आठवे ,नवम, ग्यारहवें और बारहवें भाव गोचर करता है लेकिन आठवें, सातवे, पहले, दशम,नवम, पंचम, ग्यारहवें ,छठे और तीसरे स्थान पर कोई ग्रह नही होना चाहिए तब शुभ परिणाम देता है।शुक्र ग्रह  जातक के   विवाहिक जीवन, कामेच्छा, शयन कक्ष , मनोरंजन, नृत्य, चित्रकलाओं, जल,वीर्य, गोरा रंग, स्त्रीलिंग,इत्र,दूध, फूलो ,सौभाग्य,तीखी हाजिर जबाबी, नृत्य और नाटय प्रतिमा, मादकता के कारक हैं। खून की कमी ,,मूत्राशय एवं संतानोंत्पी प्रणाली संबधित रोग , नपुंसकता और सामान्य यौनसंबंध बनाने की अयोग्यता का कारण भी शुक्र ग्रह हैं।

          नवम भाव मे शुक्र ग्रह शुभ परिणाम देता है। धनु लग्न,धनु राशि एवं मूल नक्षत्र वाले मनुष्य को अच्छा प्रभाव देगा। नए आभूषण, वस्त्र, विलासिता की वस्तुओं तथा ज्ञान की प्राप्ति होगी। शिक्षा का विस्तार,धार्मिकस्थलों की यात्राओं का शौभाग्य, जातकों के पिता के शुभ होगा।
   
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  27 नवम्बर  से 29 नवम्बर 2019 गण्डमूल नक्षत्र

          गण्डमूल नक्षत्र 
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