पंचक नक्षत्र
प्रारम्भ तिथी समय नक्षत्र समाप्ति तिथि समय
2 -12 - 2019 24 :57 घनिष्ठा 3 -12 -2019 14 :58
3-12-2019 14 :59 शतभिषा 4 -12 -2019 17 :09
4 -12 -2019 17 :10 पूर्वभाद्रपद 5 -12 -2019 20 :06
5 -12 -2019 20 :07 उत्तरभाद्रपद 6 -12 -2019 22 :55 6 -12 -2019 22 :56 रेवती 7 -12 -2019 25 :26
2 दिसंबर से 7 दिसंबर 2019 पंचक नक्षत्र का आरंभ होगा।
1 . घनिष्ठा नक्षत्र
जिस समय चन्द्रमा मकर और कुम्भ राशि मे गोचर करते हैं। उस समय घनिष्ठा नक्षत्र में होते हैं। घनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह होते है। 2 दिसम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार मध्य रात्रि 00:57 मिनट पर चन्द्रमा घनिष्ठा नक्षत्र में स्थित कुम्भ राशि मे प्रवेश करेंगे। 3 दिसम्बर 2019 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट तक कुम्भ राशि मे रहेंगे। यह एक पंचक नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक गीत - संगीत प्रेमी, साहसी ,सज्जन, अपने रिश्तेदारों द्वारा सम्मानित ,धन एवं संम्पति के स्वामी होते है।रात्रि सुख से वंचित रहते हैंऔर यह बिना शादी के जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। ज्यादातर जातक पर अशुभ ग्रहों होने के कारण नपुंसक बन जाते है। क्योंकि सप्तम का स्वामी शनि श्रवण नक्षत्र में स्थित हो जाता है।
2. शतभिषा नक्षत्र :- 3 दिसम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय के अनुसार 14 बजकर 19 मिनट पर चँद्रमा शतभिषा नक्षत्र में स्थित कुम्भ राशि मे प्रवेश करेंगे। 4 दिसम्बर 2019 पर 17 बजकर 09 मिनट तक कुम्भ राशि मे रहेंगे।शतभिषा नक्षत्र पंचक नक्षत्र हैं। शतभीषक का अर्थ है जैसे सौ चिकित्सक, सौ औषधियां या उपचार -कर्ता जो जीवन के समस्त रोगों को मिटाने की क्षमता रखता हैं।वैदिक ज्योतिष में सौ तारों वाला नक्षत्र कह कर सम्मानित किया गया हैं।विद्वानों कहना है कि शतभिषा नक्षत्र को वृताकार माना जाता है। धरती एक गोला हैं, जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती हैं।
धरती पर अनेक प्रकार चक्र होते जैसे मौसम ,दिन और रात का चक्र, शुक्ल पक्ष और कृष्णपक्ष ,जन्म लेना, जवान होना ,यौवन, वृद्धावस्था और मृत्यु तक का घटना क्रम एक प्रकार चक्र हैं। फिर दुबारा संसार मे आना।शतभिषा नक्षत्र वायु तत्व प्रधान हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक चिन्तन, मनन, विश्लेषण करने में कुशल होता हैं। जातक आध्यात्मवादी एवं दार्शनिक ,शान्त, अदभुत आकर्षक और अंतर्मुखी होता हैं। कुम्भ राशि मे महादेव निवास स्थान बताते हैं। शतभिषा नक्षत्र को को नपुंसक नक्षत्र भी मानते हैं। यदि यह पंचमेश व गुरु इस नक्षत्र हो तो जातक सन्तान सुख की कमी रहती हैं। राक्षस गण का नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र विवाह , मुकदमा दायर करना, धन का लेंन -देन ,नए वस्त्र खरीद करना वर्जित माने जाते है।
पूर्वभाद्रपद नक्षत्र :- पूर्वाभाद्रपद :- 4 दिसम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय 5 बजकर 10 मिनट पर चन्द्रमा कुम्भ राशि मे गोचर करेंगे।उसके मीन राशि मे गोचर करेगे।5 दिसम्बर 2019 रात 8 बजकर 06 मिनट तक गोचर करते रहेगे।
धरती पर अनेक प्रकार चक्र होते जैसे मौसम ,दिन और रात का चक्र, शुक्ल पक्ष और कृष्णपक्ष ,जन्म लेना, जवान होना ,यौवन, वृद्धावस्था और मृत्यु तक का घटना क्रम एक प्रकार चक्र हैं। फिर दुबारा संसार मे आना।शतभिषा नक्षत्र वायु तत्व प्रधान हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक चिन्तन, मनन, विश्लेषण करने में कुशल होता हैं। जातक आध्यात्मवादी एवं दार्शनिक ,शान्त, अदभुत आकर्षक और अंतर्मुखी होता हैं। कुम्भ राशि मे महादेव निवास स्थान बताते हैं। शतभिषा नक्षत्र को को नपुंसक नक्षत्र भी मानते हैं। यदि यह पंचमेश व गुरु इस नक्षत्र हो तो जातक सन्तान सुख की कमी रहती हैं। राक्षस गण का नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र विवाह , मुकदमा दायर करना, धन का लेंन -देन ,नए वस्त्र खरीद करना वर्जित माने जाते है।
पूर्वभाद्रपद नक्षत्र :- पूर्वाभाद्रपद :- 4 दिसम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय 5 बजकर 10 मिनट पर चन्द्रमा कुम्भ राशि मे गोचर करेंगे।उसके मीन राशि मे गोचर करेगे।5 दिसम्बर 2019 रात 8 बजकर 06 मिनट तक गोचर करते रहेगे।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र :- चन्द्रमा उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में स्थित मीन राशि मे गोचर करते रहेंगे। 6 दिसम्बर 2019 चन्द्रमा उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में 10 बजकर 55 मिनट तक मीन राशि मे रहेंगे।
यह 16 दिसम्बर, 2019 को आधी रात को 04 .01 IST पर शुरू होगा और 17दिसम्बर 2019 को 02:47 मिनट तक रहेगा।
गण्डमूल नक्षत्र
प्रारम्भ तिथि समय नक्षत्र समाप्त तिथि समय
6-12-2019 22:57 रेवती 7-12-2019 25:26
7-12-2019 25:27 अश्विनी 9-12-2019 03:30
16-12-2019 04:00 आश्लेषा 17-12-2019 02:46
17-12-2019 02:47 मघा 19-12-2019 01:25
24-12-2019 17:05 ज्येष्ठा 25-12-2019 16:45
25-12-2019 16:46 मूल 26-12-2019 16:53
रेवती नक्षत्र:
यह 6 दिसम्बबर, 2019 को शुरू होगा। चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेगा। चन्द्रमा 22 :57 रेवती नक्षत्र में स्थित में गोचर करेंगे होगा। यहाँ पर 7 दिसंबर 2019 भारतीय स्टैंड समय 1: 26 तक रहेंगे |
7,2019 दिसम्बर तक यहां रहेगा। यह एक शुभ नक्षत्र है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग कठिन, अविश्वसनीय और प्रतिकूल परिस्थितियों में मानसिक संतुलन और धैर्य रख सकते हैं। केवल अंतिम चरण में, गणड मुल्ला विपत्तिपूर्ण है। मूल निवासी कर्ण, उदर रोगों से पीड़ित है।
iv) अश्विनी नक्षत्र:
यह 7 दिसम्बर 2019 को शुरू होगा, यह 01:27 मिनट 03 बजकर 29 तक 9 दिसम्बर 2019 तक रहेगा। चंद्रमा मेष राशि में प्रवेश करेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सुंदर, बुद्धिमान और व्यवहार कुशल होते हैं। यह गण्डमूल नक्षत्र है। पहला चरण पिता के लिए अशुभ होता है। 2 और 3 चरण आम तौर पर अच्छे होते हैं। लेकिन चौथा चारण मूलनिवासी के लिए अशुभ है।v) अश्लेषा नक्षत्र:
एक बच्चे का जन्म:
आश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण: बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार होगा और वह प्रतिभाशाली होगा।
दूसरा पाडा: ऐसे लोग लालच और धोखाधड़ी के घोटालों में पारंगत होते हैं। कई विद्वानों की राय में, ऐसे लोग धन का नाश करते हैं।
तीसरा पाद: ऐसा व्यक्ति अपनी मां के लिए अशुभ होता है।
4 वा पाद: ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारी होता है।
vi) माघ नक्षत्र: -
यह तब शुरू होगा जब चंद्रमा 17दिसम्बर 2019 को शाम 02.48 IST पर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। यह 18दिसम्बर 2019 पर 1:26 गोचर करेगा ।1 पाद: इसमें जन्म लेने वाला बच्चा 5 महीने तक पिता के लिए अशुभ रहेगा।
द्वितीय पाद से चतुर्थ पाद: इन पादों में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
24 दिसम्बर 2019 को 16 बजकर 59 मिनट वृश्चिक राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रारम्भ होगा।
25 दिसम्बर 2019 भारतीय स्टैंड समय 16 बजकर 44 मिनट तक वृश्चिक राशि मे रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र सबसे बड़ा नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस नक्षत्र की गणना दिव्य शक्ति के रूप में कई जाती हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक ,पिछले कर्मो के शुभ प्रभाव से धन -वैभव व सफलता पाता हैं। वैसे राक्षस गण की उपमा दी जाती हैं। यदि यह नक्षत्र पाप से पीड़ित हो तो जातक अभिमान वंश धर्म विरुद्ध आचरण कर बैठते है। शुभ प्रभाव होतो जातक देवीय कृपा से पद ,प्रतिष्ठा, धन और यश प्राप्त करता हैं।ज्येष्ठानक्षत्र वायु प्रधान नक्षत्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र जातक यदि वायु सम्बन्धित रोग, पेट गैस तथा गठिया सरीखे रोगों से कष्ट पाते हैं।
1. ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रथम चरण में उत्पन्न जीव बड़े भाई को अरिष्टकर होता हैं।
2 दूसरे चरण में उत्पन्न बालक /बालिका छोटे भाई के लिए अरिष्टकारी होता हैं।
3.ज्येष्ठा नक्षत्र तीसरे चरण में उत्पन्न माता के अरिष्टकर होता हैं त
2. 5 दिसंबर 2019 को बुध ग्रह वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे।
panchaangastro.blogspot.com
5 दिसंबर 2019 को बुध ग्रह भारतीय स्टैंड समय 8 बजकर 29 मिनट 10 सेकण्ड पर विशाखा नक्षत्र में स्थित वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं।बुध ग्रह एक राशि मे लगभग 21 दिनों तक रहते है। बुध हमारी बुद्धिमत्ता, शिक्षा ,दोस्ती, व्यवसाय और वाणिज्य, हिसाब, भाषण, छिपाई, कला, अध्यापन, बुध के मामा- मामी, भतीजे, बहन,बुआ ,गोद लिए लड़के, चचरे भाई ,हरे घास, वेद,और पुराण का प्रतिनिधितत्व करता हैं।
5 दिसंबर 2019 को बुध ग्रह भारतीय स्टैंड समय 8 बजकर 29 मिनट 10 सेकण्ड पर विशाखा नक्षत्र में स्थित वृश्चिक राशि मे गोचर करेगे। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं।बुध ग्रह एक राशि मे लगभग 21 दिनों तक रहते है। बुध हमारी बुद्धिमत्ता, शिक्षा ,दोस्ती, व्यवसाय और वाणिज्य, हिसाब, भाषण, छिपाई, कला, अध्यापन, बुध के मामा- मामी, भतीजे, बहन,बुआ ,गोद लिए लड़के, चचरे भाई ,हरे घास, वेद,और पुराण का प्रतिनिधितत्व करता हैं।
जन्म चंद्रमा से बुध 2,4,6,8,10 और 11 भावों में गोचर शुभ परिणाम देता हैं। यदि 5,3,9,1,8 और भावो चन्द्रमा के इलावा कोई ग्रह न हो । बुध जब गोचर दूसरे भावो से अन्य ग्रहों मानसिक एकाग्रता ,प्राथमिकता में परिवर्तन को भी दर्शाता हैं।अच्छी तर्क बुद्धि देता हैं।आठवे स्थान पर बुध अच्छे परिणाम देता है।धन वृद्धि, नए बच्चे का जन्म, अनुकूलता, तीर्थ यात्रा ,सट्टे बाजार से लाभ, अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करता हैं।
वृश्चिक राशि बुध ग्रह के गोचर प्रभाव
वृश्चिक राशि, लग्न और विशाखा नक्षत्र वाले जातकों धन, लाभ, नए कार्य के लिए प्रोत्साहित करता हैं। बुद्धिमता ,वाद विवाद में विजय प्राप्त करवाता है।जो लोग मंत्रीगण हैं उनको अच्छे भाषण देने के लिए क्षमता देता हैं।यदि बुध ग्रह जन्म कुंडली मे अच्छा होता है। अच्छे परिणाम मिलेगी और बुध ग्रह वक्र स्थिति तो विपरीत प्रभाव मिलेगा। यह तभी संभव होगा जब बुध ग्रह की दिशा व अंतर दिया कुंडली चल रही हो।
बृहस्पति 14 दिसंबर 2019 से 10 जनवरी 2020 तक अस्त रहेंगे।
knowtransit.blogspot.com
3. 14 दिसंबर 2019 को बृहस्पति मूल नक्षत्र में स्थित धनु में अस्त होंगे हैं
,भारतीय स्टैंड समय सुबह 2 बजकर 39 मिनट 8सेकण्ड्स पर अस्त हो जाएंगे। इस समय बृहस्पति धनु राशि मे स्थित हैं।बृहस्पति की स्वयं राशि हैं। इस समय इस राशि मे केतु, शनि और शुक्र ग्रह युति कर रहे हैं। जिस समय सूर्य और बृहस्पति के बीच मे 9° का अन्तर होता है। उस समय अस्त हो जाते है। इस समय सूर्य 27.22 पर है। बृहस्पति की 08:22 पर मूल नक्षत्र में स्थित हैं। बृहस्पति केन्द्र में स्थित है और उनके साथ पंचम के स्वामी और नवम भाव के स्वामी भी युति में है ,एक राज योग भी बना रहे हैं। परन्तु बृहस्पति अस्त हो जाने की वजह अच्छे परिणाम नही देगा। राजयोग की छाया बनी रहेगी।जब वे सूर्य के निकट होते हैं, या संयोग के निकट होते हैं, तो उनकी अनुदैर्ध्य दूरी लगभग 180 ° होती है।
बृहस्पति ग्रह हमारे जीवन में पुत्र, पति , धन-सम्पत्ति,गुरु ,बुद्विमता, शिक्षा, ज्योतिष,तर्क, शिल्पज्ञान, अच्छे गुण,ज्ञान, चेतना के ऊपर नियंत्रण,श्रद्धा, त्याग, समृद्धि,दादा- दादी,अच्छे सदगुण, धर्म, विश्वास,धार्मिक कार्य, राजसिक सम्मान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
धनु राशि, लग्न वाले जातकों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा और जिन लोगों का जन्म में बृहस्पति मूल नक्षत्र में हुआ है। पिता अस्वस्थ हो सकते हैं। धार्मिक स्थलों की यात्राओं में कष्ट, विदेश यात्रा करने बाध्य हो सकती है।धन लाभ में रुकावटें आ सकती हैं। गर्भवती अवस्था मे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
धनु राशि, लग्न वाले जातकों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा और जिन लोगों का जन्म में बृहस्पति मूल नक्षत्र में हुआ है। पिता अस्वस्थ हो सकते हैं। धार्मिक स्थलों की यात्राओं में कष्ट, विदेश यात्रा करने बाध्य हो सकती है।धन लाभ में रुकावटें आ सकती हैं। गर्भवती अवस्था मे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जिस समय बृहस्पति अस्त होता ,उससे तीन दिन पहले और तीन बाद के बाद सभी मंगलीक / शुभ कार्य करने वर्जित हो जाते हैं। 11 दिसम्बर 2019 से 17 जनवरी 2020 तक सभी प्रकार के मंगलीक कार्य वर्जित रहेंगे।
knowtransit.blogspot.com
knowtransit.blogspot.com
4. 15 दिसंबर 2019 को शुक्र ग्रह मकर राशि में गोचर करेगे।
15 दिसम्बर 2019 शुक्र ग्रह उत्तरआषाढ़ नक्षत्र में स्थित , भारतीय स्टैंड समय पर सायंकाल 6 बजकर 21 मिनट 20 सेकण्ड पर मकर राशि मे प्रवेश करने जा रहे है। उत्तरआषाढ़ नक्षत्र के स्वामी सूर्य ग्रह हैं। मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं। मकर राशि दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करती है। जातक के जीवन में जीवन साथी, पति या पत्नी ,भोगविलास,प्रेम,काव्य,संगीत,नृत्य, वैवाहिक जीवन, ठिगनापन, सवारी, शक्ति,दक्षिण-पूर्व दिशा, भावनाओं और आवेग, सुंदरता, वाहन, वस्त्र, यौवन सुख, आभूषण,इत्र, फूल, विवाह, उत्सव,सौभाग्य, तीखी हाजिर जवाबी, जननांग, बदनामी, चापलूसी, शौचालय, मादकता, गुर्दे, दबा- खजाना, शर्मीलापन, स्त्रीलिंग का प्रतिनिधित्व करता हैं। चन्द्रकुण्डली के पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवे, आठवें, नवम, ग्यारहवें और बारहवें भाव से गुजरता शुक्र आठवें, सातवें, पहले, दसवें, नवम,पाचवें, ग्यारहवे, छठे और तीसरे भाव मे क्रमशः गोचर में अन्य ग्रह के न होने पर शुभफल देता है। एक राशि मे शुक्र ग्रह का गोचर एक महीने के लिए होता हैं। मकर राशि मे गोचर का परिणाम अशुभ देता हैं। मानसिक तनाव, झूठा प्यार, नौकरी व्यवधान, ससुरालपक्ष वालो से मतभेद, पत्नी के साथ मतभेद, पीठ एव गर्दन में दर्द , शादी में देरी हो सकती हैं। मकर राशि,लग्न और उत्तरआषाढ़ नक्षत्र वालो को यह समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।
knowtransit.blogspot.com
5. 16 दिसंबर 2019 को सूर्य धनु राशि में गोचर करेंगे।
16 दिसम्बर 2019 को भारतीय स्टैंड समय पर 18 बजकर 13 मिनट सूर्य ग्रह मूल नक्षत्र में स्थित धनु राशि मे प्रवेश करेंगे। धनु राशि ,धनु लग्न एवं मूल नक्षत्र के जातकों को प्रभावित होंगे।देव गुरु बृहस्पति धनु राशि व लग्न के स्वामी है। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह है। स्वातिक ग्रह और नक्षत्र का प्रभाव अच्छा होता हैं। सूर्य एक राशि मे एक महीने तक राशि मे गोचर करते हैं। सूर्य देव हमारी आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूर्य जन्मचन्द्रमा के तीसरे,छठे, दसवें या ग्याहरवें भाव मे शुभ परिणाम देते हैं यदि उस समय शनि के इलावा को अन्य ग्रह का इसके समानांतर वेध स्थानों 9,12,4,5 में गुजर नही होता तो इस शुभ परिणाम होता है। सूर्य का गोचर बहुत महत्वपूर्ण होता हैं।यह शरीर की ऊर्जा प्रणाली को इंगित करता है और इसके साथ हमारी भावनाओं, स्वास्थ्य एवं शक्ति को भी प्रभावित करता हैं। देह, निजी आकर्षन, दृढ़ता, बल, शानोशौकत, आत्म-निर्भरता, साहस ,कड़वाहट, वृद्धावस्था, दुष्टता, पिता, भूमि, नेत्र, स्वाद, पित्त, मानसिक पवित्रता, पूर्व दिशा, ,दार्शनिकता, राजनेतिक, सत्ता, अधिकार-क्षमता,स्वर्ण, देवाविक्रेता, चिकित्सकीय योग्यता आदि को भी प्रतिनिधित्व करता है। सरकारी इमारते, सरकारी अधिकारी, प्रशासन मुखियां को भी दर्शाता हैं।
जिस समय सूर्य चंद्र लग्न से नवम भाव मे से गुजरता है तो जातक के पिता की नाराजगी, पिता की बीमारी,अपमान, धन प्राप्ति में रुकावट, झठे इल्जाम, धन एवं मानसम्मान की हानि, बदनामी ,जुर्म,आय में कमी और असफलता प्राप्त होती हैं। जातक घमण्ड, जिद्दी, हठी, और अड़ियल बन जाता है।धर्म के रुचि न होना, अपने बड़ो का अपमान करना, आँख एवं कान सम्बन्धित रोग हो जाते हैं।
इस समय धनु राशि में शनि, बृहस्पति, और केतु पहले से विद्यमान हैं।सूर्य और शनि का योग होना प्रधान नेतृत्व के लिए भारी विषम परिस्थितियों को लेकर आ रहा है। महँगाई के वजह से जनता असन्तोष का वातावरण बनाएगा। इसके साथ व्यापारिक क्षेत्र के अच्छा नही है।
जिस समय सूर्य का महीने का गोचर होगा।
knowtransit.blogspot.com
जिस समय सूर्य का महीने का गोचर होगा।
knowtransit.blogspot.com
6. 25 दिसम्बर 2019 मंगल ग्रह विशाखा नक्षत्र में स्थित ,
भारतीय स्टैंड समय पर रात्रि 8 बजकर 16 मिनट पर वृश्चिक राशि मे प्रवेश करने जा रहे है। विशाखा नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। वृश्चिक राशि उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करती है। जातक के जीवन में भाईयो, संबधियो, भूमि, घर, बल, एवं पराक्रम, दुश्मनों, उदारता, क्रोध, अग्नि, विवाद, रक्त,पित्त, जख्म, दृष्टि, बीमारियों,हथियार,यौवन, रुकावटें, तीखा स्वाद, कड़वाहट, मानसिक स्थितरता, जहरीली गैस, मूत्र विकार, चरित्र, प्राकृतिकआपदाओ, शल्य चिकित्सा, मुकदमों, ओषधि विक्रेता, रासानिक और भौतिक प्रयोगशाला ,दक्षिणदिशा प्रतिनिधित्व करता हैं। चन्द्रकुण्डली के तीसरे, छठे ,ग्यारहवे , भाव से गुजरता मंगल बारहवे ,नवम,पाचवे, भाव मे क्रमशः गोचर में अन्य ग्रह के न होने पर अ शुभफल देता है। एक राशि मे मंगल ग्रह का गोचर एक महीने 15 दिनों तक के लिए होता हैं। वृश्चिक राशि मे गोचर का परिणाम अशुभ देता हैं। परियोजना में विघ्न कर देता है।जातक को कष्ट, दुर्घटना, चोट, खूनी बवासीर ,दाँए नेत्र,पीड़ा, पाप कर्म, धन का नाश,मूत्र सम्बंधित रोग, श्वास की समस्या, गठिया, खून की कमी, थकावट, जुए में रुचि, पत्नी से मतभेद, कामोतेजना, सुसराल से परेशानी, कारावास का भय बना रहता हैं।वृश्चिक राशि,लग्न और विशाखा नक्षत्र वालो को यह समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।
knowtransit.blogspot.com
knowtransit.blogspot.com
7. गण्डमूल नक्षत्र 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2019 तक
रेवती नक्षत्र:
यह 6 दिसम्बबर, 2019 को शुरू होगा। चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेगा। यह 22: 57: बजे होगा। यह 01:26 भारतीय समय
7,2019 दिसम्बर तक यहां रहेगा। यह एक शुभ नक्षत्र है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग कठिन, अविश्वसनीय और प्रतिकूल परिस्थितियों में मानसिक संतुलन और धैर्य रख सकते हैं। केवल अंतिम चरण में, गन्ध मुल्ला विपत्तिपूर्ण है। मूल निवासी कर्ण, उदर रोगों से पीड़ित है।
यह 16 दिसम्बर, 2019 को आधी रात को 04 .01 IST पर शुरू होगा और 17दिसम्बर 2019 को 02:47 मिनट तक रहेगा।
एक बच्चे का जन्म:
आश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण: बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार होगा और वह प्रतिभाशाली होगा।
दूसरा पाडा: ऐसे लोग लालच और धोखाधड़ी के घोटालों में पारंगत होते हैं। कई विद्वानों की राय में, ऐसे लोग धन का नाश करते हैं।
तीसरा पाद: ऐसा व्यक्ति अपनी मां के लिए अशुभ होता है।
4 वा पाद: ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारी होता है।
1 पाद: इसमें जन्म लेने वाला बच्चा 5 महीने तक पिता के लिए अशुभ रहेगा।
द्वितीय पाद से चतुर्थ पाद: इन पादों में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
25 दिसम्बर 2019 भारतीय स्टैंड समय 16 बजकर 44 मिनट तक वृश्चिक राशि मे रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र सबसे बड़ा नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस नक्षत्र की गणना दिव्य शक्ति के रूप में कई जाती हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक ,पिछले कर्मो के शुभ प्रभाव से धन -वैभव व सफलता पाता हैं। वैसे राक्षस गण की उपमा दी जाती हैं। यदि यह नक्षत्र पाप से पीड़ित हो तो जातक अभिमान वंश धर्म विरुद्ध आचरण कर बैठते है। शुभ प्रभाव होतो जातक देवीय कृपा से पद ,प्रतिष्ठा, धन और यश प्राप्त करता हैं।ज्येष्ठानक्षत्र वायु प्रधान नक्षत्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र जातक यदि वायु सम्बन्धित रोग, पेट गैस तथा गठिया सरीखे रोगों से कष्ट पाते हैं।
iv) अश्विनी नक्षत्र:
यह 7 दिसम्बर 2019 को शुरू होगा, यह 01:27 मिनट 03 बजकर 29 तक 9 दिसम्बर 2019 तक रहेगा। चंद्रमा मेष राशि में प्रवेश करेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सुंदर, बुद्धिमान और व्यवहार कुशल होते हैं। यह गण्डमूल नक्षत्र है। पहला चरण पिता के लिए अशुभ होता है। 2 और 3 चरण आम तौर पर अच्छे होते हैं। लेकिन चौथा चारण मूलनिवासी के लिए अशुभ है।v) अश्लेषा नक्षत्र:
एक बच्चे का जन्म:
आश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण: बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार होगा और वह प्रतिभाशाली होगा।
दूसरा पाडा: ऐसे लोग लालच और धोखाधड़ी के घोटालों में पारंगत होते हैं। कई विद्वानों की राय में, ऐसे लोग धन का नाश करते हैं।
तीसरा पाद: ऐसा व्यक्ति अपनी मां के लिए अशुभ होता है।
4 वा पाद: ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारी होता है।
vi) माघ नक्षत्र: -
यह तब शुरू होगा जब चंद्रमा 17 दिसम्बर 2019 को शाम 02.48 भारतीय स्टैण्ड समय पर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। यह 18दिसम्बर 2019 पर 1:26 गोचर करेगा ।1 पाद: इसमें जन्म लेने वाला बच्चा 5 महीने तक पिता के लिए अशुभ रहेगा।
द्वितीय पाद से चतुर्थ पाद: इन पादों में जन्म लेने वाले बच्चे सभी के लिए शुभ होते हैं।
24 दिसम्बर 2019 को 16 बजकर 59 मिनट वृश्चिक राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रारम्भ होगा।
25 दिसम्बर 2019 भारतीय स्टैंड समय 16 बजकर 44 मिनट तक वृश्चिक राशि मे रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र सबसे बड़ा नक्षत्र हैं। इस नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं। इस नक्षत्र की गणना दिव्य शक्ति के रूप में कई जाती हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक ,पिछले कर्मो के शुभ प्रभाव से धन -वैभव व सफलता पाता हैं। वैसे राक्षस गण की उपमा दी जाती हैं। यदि यह नक्षत्र पाप से पीड़ित हो तो जातक अभिमान वंश धर्म विरुद्ध आचरण कर बैठते है। शुभ प्रभाव होतो जातक देवीय कृपा से पद ,प्रतिष्ठा, धन और यश प्राप्त करता हैं।ज्येष्ठानक्षत्र वायु प्रधान नक्षत्र हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र जातक यदि वायु सम्बन्धित रोग, पेट गैस तथा गठिया सरीखे रोगों से कष्ट पाते हैं।
1. ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रथम चरण में उत्पन्न जीव बड़े भाई को अरिष्टकर होता हैं।
2 दूसरे चरण में उत्पन्न बालक /बालिका छोटे भाई के लिए अरिष्टकारी होता हैं।
3.ज्येष्ठा नक्षत्र तीसरे चरण में उत्पन्न माता के अरिष्टकर होता हैं त
v ) मूल नक्षत्र :- 25 दिसम्बर 2019 भारतीय स्टैंड समय अनुसार 16 बजकर 44 मिनट तक मूल नक्षत्र धनु राशि मे प्रवेश करेगे। भारतीय स्टैंड समय 16 बजकर 50 मिनट तक धनु राशि मे गोचर करेगे।
। मूल नक्षत्र क्रांतिवृत से 13 डिग्री 47 अंश 16 " दक्षिण तथा विषुवत रेखा से 37° 6' 7" दक्षिण में स्थित हैं। मूल शब्द का अर्थ पेड़ का जड़ है यानि धरती में रहस्य होता हैं। इसी तरह इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के मनोभाव , अव्यक्त इच्छाओं, अनजान क्षेत्र व अज्ञात घटनाओं के साथ माना जाता है। केतु इस नक्षत्र के स्वामी हैं। यह नक्षत्र सभी संचित कर्मो का फल देने की क्षमता रखता हैं। वही प्रारब्ध बनकर इस जन्म में जातक के सम्मुख प्रगट होता हैं। पिछले जन्मों का ज्ञान व अनुभव केतु के पास सुरक्षित हैं।
प्रथम चरण :- मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाला जातक अपने पिता का नाश करता है।
दूसरे चरण :- मूल नक्षत्र दूसरे चरण में जन्म लेने व्यक्ति अपनी माता का अरिष्ट करता है।
मूल नक्षत्र तृतीय पद में जन्म लेने वाला जातक अपने धन का नाश करता हैं।
चतुर्थ पद में जन्म लेने वाला जातक की कुछ विशेष अच्छा होता हैं।
panchaangastro.blogspot.com
8. 26 दिसम्बर 2019 को सूर्य ग्रहण भी होगा। यह गोचर धनु राशि व लग्न वाले जातकों को विशेष रूप अच्छे एवं बुरे परिणाम देगा।
इस वर्ष (संवत 2076) में तीन ग्रहण पृथ्वी पर दिखाई देंगे, जिनमें से दो ग्रहण भारत में दिखाई देंगे। एक सूर्यग्रहण 2/3 जुलाई, 2019 को खग्रास ग्रहण भारत में दिखाई देगा। क्योंकि यह IST (भारतीय मानक समय) के अनुसार मध्यरात्रि में दिखाई देगा।
ग्रहणों का विवरण नीचे दिया गया है: -
1 2/3 जुलाई, 2019 को सूर्य ग्रहण।
2 . 16-17 जुलाई 2019 को चंद्र आंशिक ग्रहण।
3. 26 दिसंबर 2019 को सूर्यग्रहण
यह सूर्य कुंडली ग्रहण 26 दिसंबर, 2019 को सुबह 8 बजे से 26 दिसंबर 2019 के दिन गुरुवार को अमावस्या के दिन दिखाई देगा, सूर्य पूरे नक्षत्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के धनु राशि में, मूला नक्षत्र में स्थित होगा। वार्षिक उत्कर्ष भी देखा जाएगा। लाइन के मध्य में स्थित, लगभग 130 किलोमीटर की चौड़ी धुंधली पट्टी (वार्षिक सूर्यग्रहण) केवल कर्नाटक, केरल और तिमलनाडु शहरों में लगभग तीन मिनट 15 सेकंड के लिए दिखाई देगी। कुंडलाकार ग्रहण लगभग 9.30 बजे शुरू होगा। ग्रहण मार्ग पर स्थित शहरों में और सभी स्थानों पर दिखाई देना शुरू हो जाएगा। जो कि इस कुंडली के मध्य से गुजरने वाली AB लाइनों पर स्थित होगा, जो मध्य रेखा से ST या HM लाइन के बीच से गुजर रही है, का समय उस शहर में कुंडलाकार सूर्य ग्रहण 3 मिनट 15 सेकंड से कम का होगा।
यह माध्य S-T और H-M पर स्थित 65-65 किलोमीटर तक समान रूप से वृत्ताकार पथ की चौड़ाई को विभाजित करता है। दक्षिणी, सूर्य डिस्क का हिस्सा पीड़ित दिखेगा। एस-टी लाइन के बारे में झूठ बोलने वाले क्षेत्र आंशिक सूर्य ग्रहण का निरीक्षण करेंगे और सूर्य के दक्षिणी हिस्से को प्रभावित देखेंगे। H-M लाइन के नीचे, आंशिक सूर्य ग्रहण दक्षिण के शहरों में दिखाई देगा, जहां सूर्य डिस्क का उत्तरी भाग पीड़ित होगा।
सूर्य ,बृहस्पति, चंद्र, बुध ,शनि और केतु ये षदग्रह सूर्य ग्रहण कालीन धनु राशि मे रहेंगे।उल्लिखित ग्रह स्थिति भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित व्यक्तियों ,व्यापारियों, चतुर्थश्रेणी के कर्मचारियों एवं सैन्य अधिकारियों के लिए भयावह हैं ।यह स्थिति पाकिस्तान,अमरीका,इजरायल , उत्तर कोरिया भारत की शासन -व्यवस्था में उलटफेर का संकेत देती है। इसके साथ भयंकर प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकम्प,विस्फोट घटनाएं हानि के योग बन रहे हैं। किसी व्यक्ति विशेष का पद रिक्त होने की सम्भावना है।
1. मूल नक्षत्र :- 25 दिसम्बर 2019 भारतीय स्टैंड समय अनुसार 16 बजकर 44 मिनट तक मूल नक्षत्र धनु राशि मे प्रवेश करेगे। भारतीय स्टैंड समय 16 बजकर 50 मिनट तक धनु राशि मे गोचर करेगे।
।
9. 28 दिसंबर 2019 को शनि ग्रह अस्त होगा।28 दिसंबर, 2019 से 30 जनवरी 2020 तक शनि ग्रह दहन रहेंगे।
28 दिसम्बर 2019 शनि भारतीय स्टैंड समय 04 बजकर 05 मिनट पर पश्चिम दिशा में अस्त होंगे। शनि इस समय उत्तरआषाढ नक्षत्र के प्रथम चरण में स्थित हैं। इस समय शनि धनु राशि मे स्थित हैं। 34 दिनों तक अस्त रहेंगे। 24 जनवरी 2020 को शनि मकर राशि मे प्रवेश करेगे। 30 जनवरी 2020 भारतीय स्टैंड समय सुबह 09 बजकर 34 मिनट 08 सेकेंड शनि उदित होंगे। शनि के बुध, बृहस्पति,सूर्य और केतु ग्रह के साथ युति में रहेंगे। राहु के साथ समसप्तक योग के साथ हिमाचलप्रदेश में हिमस्खलन, भूकंप तथा जम्मूकश्मीर में उग्रवादियों के कारण नर संहार और धन हानि के योग है।जनता बीमारियों की वजह से परेशानियों का सामना करेगी। शुक्र का कुम्भ राशि मे गोचर के कारण होगा। शनि - मंगल की दृष्टि के कारण किसी विशेष व्यक्ति के लिए कष्ट प्रद रहेगा। पंच ग्रहों के योग के कारण प्राकृतिकआपदा के संकेत है। knowtransit.blogspot.com



No comments:
Post a Comment