Thursday, October 8, 2020

दिसम्बर महीने 2020 की ज्योतिषीय रूप महत्वपूर्ण घटनाएं

 

       1       पंचक नक्षत्र मास दिसंबर 2020

        प्रारम्भ की तिथि 

समय 

नक्षत्र का नाम 

समाप्ति की तिथि 

समय 

          19 -12-2020 

  07 :17

  घनिष्ठा  

19-12  -2020 

19:40

          19 -12 -2020 

  19-41

शतभिषा 

21-12-2020 

21:01

            20 -12 -2020 

21 :02

पूर्वाभाद्रपद 

  23-12-2020 

23:02

            21 -12-2020 

23 :03

उत्तरभाद्रपद

  23-12-2020 

01 :37

            23-12-2020 

01 :38

    रेवती

24-12 -2020 

04:34








    

         2.        गण्ड मूल नक्षत्र दिसम्बर 2020      

प्रारम्भ की तिथि 

समय 

नक्षत्र का नाम 

समाप्ति की तिथि 

समय 

5 -12 -2020

14:28 

अश्लेषा 

6 -12 -2020

14 :46 

6 -12 -2020

14 :47 

   मघा 

07 -12 -2020

14:33

14 -12 -2020

04 :40

  ज्येष्ठा 

14  -12 -2020

23 :25 

 14 -12 -2020

23 :26

  मूला 

  15 -12 -2020

21 :32

23 -12 -2020

01 :36 

   रेवती 

24 -12 -2020

04 :34 

24 -12 -2020

04 :35 

   अश्विनी 

25 -12 -2020

07:37 

              3.           11 दिसम्बर 2020 को शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि मे गोचर करेगें।

11 दिसम्बर 2020 को भारतीय मानक समय 6 बजकर 03 मिनट पर शुक्र ग्रह वृश्चिक राशि मे गोचर करेगें। शुक्र इस समय विशाखा नक्षत्र में स्थापित है। विशाखा नक्षत्र चतुर्थ पद के स्वामी बृहस्पति हैं। वृश्चिकराशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। वृश्चिक राशि में सूर्य,बुध, केतु ग्रह विद्यमान है। आत्मा, शक्ति, मोक्ष,  संचार, सुंदरता का प्रवेश हैं। भचक्र में ये 16वां नक्षत्र है। 16 अंक को विपत्ति,मानसिक संताप को जोड़ा जाता है।विशाखा नक्षत्र का प्रभाव 45 से 50 वर्ष की आयु में दिखता है।कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। तीन ग्रह ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित हैं।जिसके स्वामी बुध ग्रह है।शुक्र+बुध+सूर्य+केतु का राहु का समसप्तक योग बना हुआ है।अतः कही स्थानों पर वर्षा और वायु की विषमता से खड़ी फसलों को हानि होगी।शनि की दृष्टि की वजह से तथा बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष,उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।


                4.                  15दिसंबर 2020 सूर्य धनुराशि में गोचर करेंगे।

15 दिसम्बर 2020 को भारतीय मानक समय 20 बजकर 48 मिनट पर सूर्य ग्रह धनु राशि मे गोचर करेगें। सूर्य इस समय मूल नक्षत्र में स्थापित है। मूल नक्षत्र चतुर्थ पद के स्वामी केतु हैं। धनु राशि के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं। वृश्चिक राशि में सूर्य,चन्द्र  ग्रह विद्यमान है। मन-आत्मा का प्रवेश हैं। भचक्र में ये 19 वें नक्षत्र है। 19अंक को आद्योपांत, लौकिक सुख,प्रभु का सच्चा सुख पाने की कोशिश के साथ जोड़ा जाता है।  सूर्य मूल नक्षत्र में है चन्द्र भी मूल नक्षत्र में स्थित हैं। ।बृहस्पति और शनि द्वितीय भाव मे स्थित है।किसी दुःखद घटना से परेशानी बनेगी।शनि की दृष्टि मंगल पर है जिससे उग्रवादीजन्य घटना से जनधनहानि की भी सम्भावना बनती दिखाई दे रही। हैं।व्यापारीवर्ग में सरकारी शासन तन्त्र के प्रति जनसाधारण असुन्तुष्ट रहेगा।ओद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की योजना आर्थिक संकट से जूझे।प्राकृतिक प्रकोप से पर्वतीय भूभाग में हानि के योग बन रहे है। बुध + शुक्र+केतु का अतः कही स्थानों पर वर्षा और वायु की विषमता से खड़ी फसलों को नुकसान होगा।शनि की दृष्टि की। कारण से और बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष, उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।

             5.        24दिसंबर 2020 को मंगल ग्रह मेष राशि मे गोचर करेगें।

24 दिसम्बर 2020 को भारतीय मानक समय 09बजकर 50मिनट पर मंगल ग्रह मेष राशि मे गोचर करेगें। मंगल इस समय अश्विनी नक्षत्र में स्थापित है। अश्विनी नक्षत्र केतु ग्रह हैं।मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। मेष राशि में सूर्य,चन्द्र  ग्रह विद्यमान है। मन-शक्ति का प्रवेश हैं। भचक्र में ये प्रथम नक्षत्र है। 1अंक को सृष्टि तारा हैं तो नारी को सृजन शक्ति का प्रतीक माना जाता हैं।अश्व का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। सिर का सम्बंध मस्तिष्क व सभी अवयवों पर नियंत्रण शक्ति से है।अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव 35 से 50 वर्ष की आयु में दिखता है।स्वभाव और कार्यशैली को भली प्रकार समझा जा सकता है। दोंनो ग्रह अश्विनी नक्षत्र में स्थित है।शनि की मंगल पर दृष्टि रहेगी।शनि-बृहस्पति मकर राशि मे स्थित हैअतः प्रजा में रोग ,प्राकृतिक प्रकोप,भारी उपद्रवो से भारी कष्ट हो।कही स्थानों पर वर्षा और वायु की विषमता से खड़ी फसलों को नुकसान होगा।शनि की दृष्टि की। कारण से और बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष, उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।


             6.  17दिसंबर 2020 को बुध धनु राशि मे गोचर करेगे।
             17दिसंबर 2020 को  भारतीय मानक समय 10बजकर 47 मिनट पर बुध ग्रह धनु राशि मे गोचर करेगें। बुध इस समय मूल नक्षत्र में स्थापित है। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। धनु राशि के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं। वृश्चिक राशि में सूर्य,चन्द्र  ग्रह विद्यमान है। मन-आत्मा का प्रवेश हैं। भचक्र में ये 19 वें नक्षत्र है। 19अंक को शौलाबिच्छू का डंक हैं, इस तारे की सतह के तापमान 30 हजार सेल्शियस आंका गया है।मूल नक्षत्र सबसे दक्षिणी नक्षत्र है।मूल नक्षत्र में जन्म वाला जातक सीधा,सरल व स्पष्टवादी होता है।कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने कठोर परिश्रम करना पड़ता है। तीन ग्रह उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में स्थित हैं। जिसके स्वामी सूर्य ग्रह हैं।शनि + बृहस्पति + चन्द्र युति  में है।शनि की मंगल ग्रह पर है।अतः कही स्थानों पर वर्षा और खड़ी फसलों को नुकसान होगा।  बृहस्पति अपनी नीचस्थ होने के कारण कही स्थानों पर दुर्भिक्ष, उग्रवाद की घटनाओं के योग बन रहे हैं।साम्प्रदायिक दंगे बढेगा।फसलों के खराब होने से अनाज की कमी देखने को मिलेगी।

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